भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c27.15
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c27.15
- Language
- Hindi
c27.15
कैथी लिपि—यह लिपि वास्तव में नागरी का किंचित् परिवर्तित रूप ही है. कायस्थ (कायथ) अर्थात् अहल्कार लोगों की त्वरा से लिखी जानेवाली लिपि होने से इसको 'कैथी' (कायथी) कहते हैं. जैसे मामूली पढ़े हुए लोगों की लिपियों में संस्कृत की पूरी वर्णमाला का उपयोग नहीं होता वैसे ही इसमें भी ऋ, ङ और ञ अक्षर नहीं है, और व तथा 'ब' में अंतर नहीं है. 'व' को 'ब' से भिन्न बतलाने के लिये टाइप के अक्षरों में 'व' के नीचे एक बिंदी लगाई जाती है. अ, ख और झ नागरी से भिन्न हैं जिनमें से 'अ' तो नागरी के 'अ' को चलती कलम से लिखने में ऊपर ग्रंथि बन जाने के कारण 'अ' सा बन गया है और 'ख' नागरी के 'ष' का विकार मात्र है. पहिले यह लिपि गुजराती की नांई लकीर खींच कर लिखी जाती थी परंतु टाइप में सरलता के विचार से सिरसूचक लकीर मिटा दी गई है. बिहार की पाठशालाओं में नीचे की श्रेणियों में इस लिपी की छुपी हुई पुस्तकें पढ़ाई जाती हैं. देशभेद के अनुसार इसके मुख्य तीन भेद हैं अर्थात् मिथिला, मगध और भोजपुर की कैथी.