भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c30.s17.1
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c30.s17.1
- Language
- Hindi
c30.s17.1
रंगीन स्याहियों में लाल स्याही मुख्य है. वह दो तरह की होती है. एक तो अलना की और दूसरी हिंगलू की, जो उसको गोंद के पानी में घोल कर बनाई जाती है. हस्तलिखित वेद के पुस्तकों में स्वरों के चिह्न, और सब पुस्तकों के पत्रों पर की दाहिनी और बाईं ओर की हाशिये की दो दो खड़ी लकीरें अलना या हिंगलू से बनी हुई होती हैं. कभी कभी अध्याय की समाप्ति का अंश, एवं ‘भगवानुवाच’, ‘ऋषिरुवाच’ आदि वाक्य तथा विरामसूचक खड़ी लकीरें लाल स्याही से बनाई जाती हैं. ज्योतिषी लोग जन्मपत्र तथा वर्षफल के लंबे लंबे खरड़ों में खड़े हाशिये, आड़ी लकीरें तथा भिन्न भिन्न प्रकार की कुंडलियां लाल स्याही से ही बनाते हैं.