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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c30.s17.2

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c30.s17.2

Language
Hindi

c30.s17.2

सूखे हरे रंग को गोंद के पानी में घोल कर हरी, जंगाल से जंगाली और हरिताल से पीली स्याही भी लेखक लोग बनाते हैं. कभी कभी पुस्तकों के अध्याय आदि समाप्ति के अंशों में वे इन रंगीन स्याहियों का उपयोग करते और विशेष कर जैन पुस्तकों में उनसे लिखे हुए अक्षर मिलते हैं. बहुधा सब पुस्तकलेखक जिन अक्षरों या शब्दों को काटना होता उनपर हरिताल फिरा देते अथवा स्याही से उनके चारों ओर कुंडल या ऊपर खड़ी लकीरें बना दिया करते थे.