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भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c30.s16.8

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c30.s16.8

Language
Hindi

c30.s16.8

dagger कश्मीरी लिपि में ‘म’ और ‘श’ में इतना ही अंतर है कि ‘म’ के ऊपर शिर की लकीर नहीं लगती और ‘श’ के लगती है (देखो, लिपिपत्र ३१), बाकी कोई भेद नहीं है. सांची के एक स्तूप में से पत्थर के दो गोल डिब्बे मिले हैं जिनमें सारिपुत्र और महामोगलान की हड्डियां निकली हैं. एक डिब्बे के ढक्कन पर ‘सारिपुतस’ खुदा है और भीतर उसके नाम का पहिला अक्षर ‘सा’ स्याही से लिखा हुआ है. दूसरे के ढक्कन पर ‘महामोगलानस’ खुदा है और भीतर ‘म’ अक्षर स्याही का लिखा हुआ है. सारिपुत्र और महामोगलान दोनों बुद्धदेव (शाक्य मुनि) के मुख्य शिष्य थे. सारिपुत्र का देहांत बुद्धदेव की मौजूदगी में हो गया था और महामोगलान का बुद्ध के निर्वाण के बाद हुआ था. यह स्तूप ई. स. पूर्व की तीसरी शताब्दी का बना हुआ माना जाता है (कनिंगहाम का ‘भिलसा टोप्स’, पृ. २६४-३०८). यदि ये डिब्बे उक्त स्तूप के बनने के समय नये बनाये जाकर उनमें वे हड्डियां रक्खी गई थीं ऐसा माना जावे तो ये स्याही से लिखे हुए अक्षर ई. स. पूर्व की तीसरी शताब्दी के होने चाहिये परंतु यदि यह माना जावे कि ये डिब्बे किसी अन्य स्तूप से निकाले जाकर सांची के स्तूप में रक्खे गये थे तो उक्त स्याही के अक्षरों के लिखे जाने का समय ई. स. पूर्व की पांचवीं शताब्दी होगा.