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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c30.s8.12

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c30.s8.12

Language
Hindi

c30.s8.12

१ ‘ओं ( सांकेतिक चिह्न से ) नमः शिवाय’ ( लिपिपत्र २१ की मूल पंक्तियों के प्रारंभ में ), ‘ओं ( सांकेतिक चिह्न से ) नमो विष्णवे’ ( लिपिपत्र २३ की मूल पंक्तियों के प्रारंभ में ), ‘नमो अरहंतो वर्धमानस्र्य’ ( लिपिपत्र ५ की मूल पंक्तियों के प्रारंभ में ), ‘ओं ( सांकेतिक चिह्न से ) ओं नमो वीतरागाय’ ( राजपूताना म्यूज़िअम में रक्खे हुए परमार राजा विजयराज के समय के वि. सं. ११६६ के शिलालेख के प्रारंभ में ), ‘ओं ( सांकेतिक चिह्न से ) नमो बुद्धाय’ ( ऍ. इं; जि. १२, पृ. २८ के पास का सेट ), ‘ओं नमो रत्नत्रयाय’ ( शेरगढ का लेख; इं. ऍ; जि. १४, पृ. ४५ ) आदि. लेखों के अंत में कभी कभी ‘श्रीः’, ‘शुभं भवतु’, ‘श्रीरस्तु’ आदि शब्द मिलते हैं और कभी कभी ‘॥ छ ॥’ लिखा हुआ मिलता है. यह ‘छ’ प्राचीन ‘थ’ अक्षर का रूपांतर प्रतीत होता है जो वास्तव में धर्मचक्र या सूर्य का सूचक होना चाहिये.