भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c30.s8.22
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c30.s8.22
- Language
- Hindi
c30.s8.22
किसी अक्षर या शब्द को भूल से छोड़ जाता तो वह अक्षर या शब्द या तो पंक्ति के ऊपर या नीचे अथवा हाशिये पर लिखा जाता था और कभी वह अक्षर या शब्द किस स्थान पर चाहिये था यह बतलाने के लिये ^ या × चिह्न भी मिलता है जिसको ‘काकपद’ या ‘हंसपद’ कहते हैं१. भूल से अधिक लिखा हुआ अक्षर, शब्द, मात्रा या अनुस्वार आदि या तो टांकी से उड़ा दिया जाता या उस पर छोटी छोटी खड़ी या तिरछी लकीर या लकीरें२ बना कर उसे काट दिया जाता था. कई लेखों के अंत में उनके लगाये जाने या उनसे संबंध रखनेवाले स्थानों के बनने का संवत्, ऋतु, मास, दिन, पक्ष, तिथि आदि३ एवं उनके रचयिता, लेखक और खोदनेवालों के नाम भी दिये हुए मिलते हैं४. मंदिर आदि की दीवारों के ताकों में लगाये जानेवाले लेख बहुधा एक ही छोटी या बड़ी शिला पर खुदे हुए होते हैं परंतु कभी पांच तक पर भी खुदे हुए मिलते हैं५. ये लेख प्राकृत, संस्कृत, कनड़ी, तेलुगु, तामिळ, प्राचीन हिंदी आदि भाषाओं में हैं.