भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c30.s8.23
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c30.s8.23
- Language
- Hindi
c30.s8.23
१ बुद्धगया से मिले हुए अशोकचल्ल के लक्ष्मणसेन संवत् ५१ के लेख की पहिली पंक्ति में ‘तथागतो द्यवदत्’ में ‘वो’ लिखना रह गया जिसको पंक्ति के ऊपर लिखा है और नीचे ^ चिह्न बनाया है (एं. इं; जि. १२, पृ. २८ के पास का प्लेट). वि. सं. १२०७ की महाबन की प्रशस्ति की ८ वीं पंक्ति में ‘तस्याभूत्तनयो नयोन्नतमतिः’ में दूसरा ‘नयो’ लिखना रह गया जिसको पंक्ति के नीचे लिखा है. उसी प्रशस्ति की ११ वीं पंक्ति में [८ वें] श्लोक का चतुर्थ चरण लिखना रह गया, जो बाईं ओर के हाशिये पर लिखा गया है और जहां वह चाहिये था उस स्थान पर पंक्ति के ऊपर () चिह्न किया है. ऐसे ही उसी प्रशस्ति की २० वीं पंक्ति में [१७ वां] श्लोक रह गया वह भी बाईं ओर के हाशिये पर लिखा है और जहां वह चाहिये था वहां पंक्ति के ऊपर × चिह्न किया है और वही चिह्न हाशिये पर (अंत में) दिया है (एं. इं; जि. २, पृ. २७६ के पास का प्लेट).