भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c31.s7.37
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s7.37
- Language
- Hindi
c31.s7.37
विक्रम संवत् का प्रारंभ कलियुग संवत् के (५०१६-१६७५=) ३०४४ वर्ष व्यतीत होने पर माना जाता है जिससे इसका गत वर्ष १ कलियुग संवत् ३०४५ के बराबर होता है. इस संवत् में से ५७ या ५६ घटाने से ईसवी सन् और १३५ घटाने से शक संवत् आता है. इसका प्रारंभ उत्तरी हिंदुस्तान में चैत्र शुक्ला १ से और दक्षिण में कार्तिक शुक्ला १ से होता है जिससे उत्तरी (चैत्रादि) विक्रम संवत् दक्षिणी (कार्तिकादि२) विक्रम संवत् से ७ महीने पहिले प्रारंभ होता है. उत्तरी हिंदुस्तान में महीनों का प्रारंभ कृष्णा १ से और अंत शुक्ला १५ को होता है, परंतु दक्षिण में महीनों का प्रारंभ शुक्ला १ से और अंत कृष्णा अमावास्या को होता है. इस लिये उत्तरी विक्रम संवत् के महीने पूर्णिमांत और दक्षिणी के अमांत (दर्शांत) कहलाते हैं. शुक्ल पक्ष तो उत्तरी और दक्षिणी हिंदुस्तान में एक ही होता है परंतु उत्तरी हिंदुस्तान का कृष्ण पक्ष दक्षिणी से १ महीना पहिले रहता है अर्थात् जिस पक्ष को हम उत्तरी हिंदुस्तानवाले वैशाख कृष्ण कहते हैं उसीको दक्षिणवाले चैत्र कृष्ण लिखते हैं. काठियावाड़, गुजरात तथा राजपूताने के कुछ अंश में विक्रम३ संवत् का प्रारंभ आषाढ शुक्ला १ (अमांत) से भी होता था जिससे उसको 'आषाढादि' संवत्' कहते थे. राजपुताने के उदयपुर आदि राज्यों में राजकीय विक्रम संवत् अब श्रावण कृष्णा (पूर्णिमांत) से प्रारंभ होता है.