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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c31.s8.32

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c31.s8.32

Language
Hindi

c31.s8.32

गत शक संवत् में ३१७६ जोड़ने से कलियुग संवत्, १३५ जोड़ने से गत चैत्रादि विक्रम संवत् और ७८ (अंत के करीव तीन महीनों में ७६) जोड़ने से ई. स. आता है. यह संवत् बहुधा सारे दक्षिण में (तिन्नेवेल्लि और मलबार प्रदेशों को छोड़ कर) प्रचलित है. उत्तरी हिंदुस्तान में पंचांग, जन्मपत्र और वर्षफल आदि में विक्रम संवत के साथ यह भी लिखा जाता है और वहां के शिलालेखादि में भी कभी कभी इसके वर्ष लिखे मिलते हैं. इसका प्रारंभ चैत्र शुक्ला १ से होता है. इसके महीने उत्तरी हिंदुस्तान में पूर्णिमांत, और दक्षिण में अमांत माने जाते हैं. दक्षिण के जिन हिस्सों में सौर मान का प्रचार है वहां इसका प्रारंभ मेष संक्रांति से होता है. करण ग्रंथों के आधार पर पंचांग बनानेवाले सारे भारतवर्ष के ज्योतिषी इसी संवत् का आश्रय लेते हैं. पंचांगों में इसके वर्ष गत ही लिखे रहते हैं. शिलालेख और दानपत्रों में भी विशेष कर गत वर्ष ही लिखे मिलते हैं वर्तमान वर्ष कम.