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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c7.101

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c7.101

Language
Hindi

c7.101

१५ यह संभव नहीं कि यास्क अथवा पाणिनि ने इतने आचार्यों के एक विषय के ग्रंथ कंठस्थ करके उनका तारतम्य विचार कर नया निरुक्त अथवा व्याकरण बनाया हो. यदि उस समय लिखना या लिखित ग्रंथ न थे तो क्या पाणिनि और यास्क इन सब आचार्यों के ग्रंथों को वेद के सूक्तों की तरह कंठस्थ करने वालों को सामने बिठाकर उनके मत सुनते गये होंगे और अपना निबंध बना कर स्वयं रटते और शिष्यों को रटाते गये होंगे?

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