भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c7.160
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c7.160
- Language
- Hindi
c7.160
लिखना न जानने वालों को न तो परार्ध तक की संख्या का ज्ञान होता है और न उनको 'प्रयुत,' 'अयुत' आदि बड़ी संख्याओं के सूचक शब्दों के गढ़ने या जानने की आवश्यकता होती है. ऐसी संख्या का जानना लिखना जानने के पीछे भी केवल उस दशा में होता है जब गणितविद्या अच्छी अवस्था को पहुंच जाती है. ग्रीक लोग जब लिखना नहीं जानते थे उस समय उनको अधिक से अधिक १०००० तक का ज्ञान था और रोमन् लोग ऐसी दशा में केवल १००० तक ही जानते थे. इस समय भी हमारे यहां के जो मनुष्य लिखना नहीं जानते वे बहुधा १०० तक भी अच्छी तरह नहीं गिन सकते; यदि उनसे पचासी कहा जावे तो वे कुछ न समझेंगे और यही प्रश्न करेंगे कि पचासी कितने होते हैं? जब उनको यह कहा जायगा कि 'चार बीसी और पांच' तभी उनको उक्त संख्या का ठीक ज्ञान होगा. वे २० तक की गिनती जानते हैं जिसको 'बीसी' कहते हैं; फिर एके बीसी और सात (२७), चार बीसी और पांच (८५), इस तरह गिनते हैं.