भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c7.176
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c7.176
- Language
- Hindi
c7.176
हिंदू लोग प्राचीन रीतियों का धर्म की तरह आग्रहपूर्वक पालन करते हैं और उनमें भरसक परिवर्तन नहीं करते. कपड़े से बने हुए कागज़ का बहुत प्रचार होने पर भी मंत्र, यंत्र आदि को भोजपत्र पर लिखना ही अब तक पवित्र माना जाता है. सस्ती और सुंदर छापे की पुस्तकें प्रचलित हुए एक शताब्दी बीतने आई तो भी पूजापाठ में हस्तलिखित पुस्तकों का ही बहुधा प्रचार है और जो कर्मकांडी छपी हुई पद्धति लेकर विवाह आदि कराने जाता है उसका बहुधा अनादर होता है. जैसे आजकल कर्मकांडी या पौराणिक छपी पुस्तकों पर से पढ़ते हैं परंतु कर्म या पारायण के समय बहुधा हस्तलिखित पुस्तक ही काम में लाते हैं वैसे ही प्राचीन काल में विचार, स्वाध्याय और व्याख्यान के लिये लिखित पुस्तक काम में आते थे, परंतु पढ़ाना, मंत्रपाठ और शास्त्रार्थ मुखस्थ विद्या की पुरानी रीति से होता था.