Pramāṇa · Search · About · API

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c7.184

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c7.184

Language
Hindi

c7.184

और भोजपत्र प्रकृति ने यहां बहुत प्रचुरता से उत्पन्न किये हैं. मिसर के पॅपायरस१ की तरह उन्हें खेती करके प्राप्त करने की यहां आवश्यकता न थी. भारतवासी रूई से कागज़ बनाना भी ई. स. पूर्व की चौथी शताब्दी से पहिले जान गये थे२. पुराणों में पुस्तक लिखवा कर दान करने का बड़ा पुण्य माना गया है. चीनी यात्री हुएंत्सग यहां से चीन को लौटते समय बीस घोड़ों पर पुस्तकें लाद कर अपने साथ ले गया जिनमें ६५७ भिन्न भिन्न पुस्तक३ थे. मध्यभारत का श्रमण पुण्योपाय ई. स. ६५५ में १५०० से अधिक पुस्तक४ लेकर चीन को गया था. ये बौद्ध भिक्षु कोई यूरोप या अमेरिका के धनाढ्य तो थे नहीं कि यहां तोड़े खोल कर पुस्तक मोल लें. उन्हें जितने पुस्तक मिले वे गृहस्थों, भिक्षुओं, मठों या राजाओं से दान में मिले होंगे. जब दान ही दान में इतने ग्रंथ उनको मिल गये तो सहज ही में अनुमान हो सकता है कि लिखित पुस्तकों की यहां कितनी प्रचुरता थी.