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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c9.19

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c9.19

Language
Hindi

c9.19

१ कुशनवंशी राजाओं के समय के खरोष्ठी लिपि के लेख अधिक संख्या में मिले हैं. राजा कनिष्क के समय का एक शिलालेख (सं. ११ का) ज़ेड़ा (ज़िले यूसफ़ज़ई में) से (ज. ए. ई. स. १८६०, भाग १, पृ. १३६); एक ताम्रलेख (सं. ११ का) सुएविहार (पंजाब के बहावलपुर राज्य में) से (इं. पँ; जि. १०, पृ. ३२६; और जि. ११, पृ. १२८); एक लेख माणिक्याल से (क; आ. स. रि; जि ५, पृ. १६० के सामने का प्लेट); और पेशावर के कनिष्कविहार के स्तूप से मिले हुए डिब्बे पर खुदे हुए तीन छोटे छोटे लेख (आ. स; ई. स. १९०६-१०, पृ. १३६-३८) मिले हैं. आरा नामक नाले (बाघनीलाब से २ मील पर-पंजाब में) के अंदर के एक पुराने कुप में से वाशिेप्प के पुत्र कनिष्क के समय का एक शिलालेख (सं. ४१ का) मिला है (इं. पँ; जि. ३७, पृ. ५८). हुविष्क के समय का एक लेख (सं. ५१ का) वर्डक (अफ़गानिस्तान में) के स्तूप में से मिले हुए एक पीतल के पात्र पर खुदा है (ए. इं; जि. ११, पृ २१०-११). पंजतार (ज़िले युसफ़ज़ई में) से एक शिलालेख (सं. १२२ का) किसी गुशन (कुशन) वंशी राजा के समय का (क; आ. स. रि; जि. ५, पृ. १६१, और प्लेट १६, संख्या ४), तथा महाराज राजातिराज देवपुत्र खुशन (कुशन. उक्त नाम के राजा या कुशन वंशी किसी राजा) का एक लेख (सं १३६ का) रौप्यपत्र पर खुदा हुआ तक्षशिला से मिला है (ज. रॉ. ए. सो; ई. स. १६१४, पृ. ६७२-७६ और ई. स. १६१५, पृ. १६२ के सामने का प्लेट).