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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c9.20

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c9.20

Language
Hindi

c9.20

२ हिड्डा के स्तूप से मिले हुए मिट्टी के पात्र पर (सं. २८ का) लेख (ज. रॉ. ए. सो; ई. स. १६१५, पृ. ६२, और उस के सामने का प्लेट); शकदरी (पंजाब के ज़िले अटक में) से मिला हुआ (सं. ४० का) शिलालेख (इं. पँ; जि. ३७, पृ. ६६); ओहिंद (यूसफ़ज़ई ज़िले में) का (सं. ६१ का) लेख (क; आ. स. रि; जि. ५, पृ. ५८; सेट १६, संख्या २.); फतहजंग (ज़िले अटक में) का (सं. ६८ का) शिलालेख (ज. ए; ई. स. १८६०, भाग १, पृ. १३०); सुचइ (ज़िले यूसफ़ज़ई में) से मिला हुआ (सं. ८१) का शिलालेख (इं. पँ; जि. ३७, पृ. ६४); बाँज पहाड का (सं. १०२ का) लेख (ज. ए; ई. स. १८६४, भाग २, पृ. ५१४); पाजा (ज़िले यूसफ़ज़ई में) का (सं. १११ का) शिला लेख (इं. पँ; जि. ३७, पृ. ६५); कलदरा नदी (पश्चिमोत्तर सीमांत प्रदेश में दर्गई के पास) में से मिला हुआ (सं. ११३) का शिलालेख (इं. पँ; जि. ३७, पृ. ६६); स्कारहढेरी (चारसड्डा अर्थात् हस्तनगर से ८ मील उत्तर में) से मिली हुई हारिती की मूर्त्ति के आसनपर खुदा हुआ (सं. १७६ का) लेख (आ. स; ई. स. १६०३-४; पृ. २५५; सेट ७०, संख्या ६); देवाई (ज़िले यूसफ़ज़ई में) का (सं २०० का) शिलालेख (ज. ए; ई. स. १८६४, भाग २, पृ. ५१०); लोरियन तंगाई (ज़िले स्वात में) से मिली हुई बुद्ध की मूर्त्ति के आसन पर खुदा हुआ (सं. ३१८ का) लेख (आ. स; ई. स. १६०३-४; पृ. २५२; सेट ७०, संख्या ४); हस्तनगर (पेशावर ज़िले की चारसड्डा तहसील में) से मिली हुई बुद्ध की (अपने शिष्यों सहित) मूर्त्ति के आसन पर खुदा हुआ (सं. ३८४ का) लेख (ए. इं; जि. १२, पृ. २०२). ये सब साधारण पुरुषों के संवत् वाले लेख हैं. इन लेखों में जो संवत् लिखा है वह कौन सा है यह अभी तक पूर्णतया निश्चित नहीं हुआ, परंतु हमारी संमति में उनमें से अधिकतर लेखों का संवत् शक् संवत् ही होना चाहिये. बिना संवत् वाले लेख ये हैं— तक्षशिला के गंगू नामक स्तूप से मिला हुआ सुवर्णपत्र पर खुदा हुआ लेख (क; आ. स. रि; जि. २, पृ. १३०, और प्लेट ५६); माणिक्याल के स्तूप से मिले हुए छोटे से रौप्यपत्र पर खुदा हुआ छोटा सा लेख (पँ. इं; जि. १२, पृ. २०१); तक्षशिला के स्तूप से मिला हुआ ताम्रपत्र पर का लेख (क; आ. स. रि; जि. २, सेट ५६, संख्या ३; ज. ए. सो. बंगा; ई. स. १६०८, पृ. ३६४); तक्षशिला के स्तूप से मिले हुए पात्र पर का लेख (दूँ. इं; जि. ८, पृ. २६६); मोरा (कालाहिसार से १० मील पश्चिम में) के एक चौकूंटे प्राचीन कुए में तीन तरफ एक एक छोटा लेख (क; आ. स. रि; २ सेट ५६); चारसड्डा (पुष्कलावती) के स्तूपों से मिले हुए ५ छोटे छोटे लेख, जिनमें से ३ मिट्टी की इंडियां पर (आ. स; १६०२-३, पृ. १६३) और दो मूर्तियों के आसनों पर (आ. स; १६०२-३, पृ. १६७, १६८) खुदे हुए हैं; कन्निआरा और पठ्यार (दोनों ज़िले कांगड़ा में) से एक एक छोटा लेख (चट्टान पर खुदा) (पँ. इं; जि. ७, पृ. ११८ के सामने का सेट); यूसफ़ज़ई ज़िले में सहरी बहलोल से दो, और सह्री से एक शिलालेख, (क; आ. स. रि; जि. ५, सेट १६, संख्या, ५ और ६); और गांधार शैली की मूर्त्तियों के आसनों पर के ६ छोटे छोटे लेख (आ. स; ई. स. १६०३-४; सेट ७०, संख्या २, ३, ५, ६, ७ और ८).