Pracin Bharatiya Veshabhusha c11.8
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c11.8
- Language
- Hindi
c11.8
भारतीय वेश-भूषा की प्रचुर सामग्री हमें इस युग की मूर्तियों और अर्धचित्रों में मिलती है। उत्तर पश्चिमी सीमाप्रान्त की गंधार-मूर्तियां, मथुरा की कुषाण मूर्तियां तथा अमरावती, नागार्जुनीकुंड और गोल्ली से मिले अर्धचित्र हमें यह बतलाते हैं कि धोती, साड़ी तथा पगड़ी पहनने में कौन कौन सी स्थानिक विशेषताएं थीं। उत्तर पश्चिमी भारत में शुद्ध भारतीय वेश-भूषा के सिवाय कंचुक, शलवार, टोपियां इत्यादि विदेशी वस्त्र भी काम में लाये जाते थे । ये वस्त्र प्राचीनभारत और मध्य एशिया तथा ईरान के सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध के प्रतीक हैं । गंधार की कला यूनानी कला से प्रभावित थी जिसके फल-स्वरूप हम गंधार की कला में स्त्री-पुरुषों को कभी कभी यूनानी कपड़े पहने देखते हैं। कुषाण सिक्कों पर अंकित कुषाण राजाओं की आकृतियों से हमें शकों की वेश-भूषा का अच्छा पता लगता है। दक्षिण भारत में स्त्रियों और पुरुषों की वेश-भूषा बहुत सादी होती थी।