Pracin Bharatiya Veshabhusha c13.s2.10
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c13.s2.10
- Language
- Hindi
c13.s2.10
इन विदेशी दासियों के वेश-भूषा का प्रभाव तत्कालीन भारतीय वेश-भूषा पर काफी पड़ा होगा, कम से कम अजंता के भित्तिचित्रों में आयी दास दासियों की आकृतियों से तो यही पता चलता है । लेकिन यह मान लेना भ्रमात्मक होगा कि इस देश में विदेशी वेश-भूषाओं का प्रवेश केवल दासियों द्वारा ही हुआ। यथार्थ में शकों और कुषाणों की चढ़ाइयां, विदेशों से व्यापारिक संबंध तथा बाहर के यात्री इन सब कारणों से भी यहां विदेशी वस्त्रों का कुछ कुछ प्रचार बढ़ा होगा । शक इस देश में कुलाह, तिकोने गले वाले कंचुक तथा पूरे पैर के बूट लाये । भारतीय वेश-भूषा के क्षेत्र में इस विदेशी धावे की कहानी हम अजंटा के भित्तिचित्रों में पढ़ सकते हैं और यह भी देख सकते हैं कि किस तरह से विदेशी पहरावे भारतीयता के रंग में ढल रहे थे । समन्वय की भावना गुप्त कला तक ही सीमित न रह कर वेश-भूषा के क्षेत्र में भी आयी।