Pracin Bharatiya Veshabhusha c13.s2.12
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c13.s2.12
- Language
- Hindi
c13.s2.12
गुप्तयुग के सिपाहियों की वर्दी की ओर भी ध्यान देना आवश्यक है। अजंटा के भित्तिचित्रों में सैनिकों का एक भाग धोती पहनता है, लेकिन दूसरा भाग कंचुक, पायजामा अथवा जांघिया और पूरे बूट पहनता है ओर अपने बाल फीते अथवा रूमाल से बांधता है। वास्तव में देखा जाय तो उनकी वेश-भूषा पूर्व निश्चित वर्दी के रूप में है। गुप्तयुग के पहिले की शताब्दियों में, सिवाय कहीं कहीं शातवाहन युग को छोड़ कर, सिपाहियों की कोई पूर्व निश्चित वरदी नहीं थी ओर अधिकतर सिपाही धोती ही पहनते थे। गुप्तयुग में सिपाहियों की वर्दी सम्भवतः कुषाणकाल की वर्दी के आश्रय पर बनी। गुप्तराजे पराक्रमी योद्धा थे और उन्हें अपनी विजय-यात्राओं के लिए हमेशा एक सुशिक्षित, सुवेष्टित और सामानों से लंस सेना की आवश्यकता रहती थी। नयी वर्दी की उपादेयता गुप्तों की व्यापारिक बुद्धि को ठीक जंची होगी और उसी के फलस्वरूप एक राष्ट्रीय सेना का सृजन हुआ होगा। सेना में जिस तरह का हेर-फेर कुषाण सेना के संगठन को ले कर हुआ होगा। यह भी संभव है कि हूणों से लड़ाई लड़ते समय इस तरह के संगठन और वर्दी की उपयोगिता का ज्ञान गुप्तों में हुआ होगा। जो भी हो इस प्रश्न का निराकरण आसानी से नहीं हो सकता।