Pracin Bharatiya Veshabhusha c13.s3.5
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c13.s3.5
- Language
- Hindi
c13.s3.5
सभ्य समाज का एक नियम सा है कि उसके अंतर्गत रहने वाले अच्छे कपड़े पहनें और इसके लिए इस बात की आवश्यकता होती है कि तरह तरह के रंगीन और नक्काशीदार कपड़े बनें। बढ़िया कपड़ों की इस देश में और बाहर काफी मांग थी। भारतीय समाज के स्त्री और पुरुष दोनों कपड़े के शौकीन थे । इस युग में छपाई की भी काफी उन्नति हुई और तत्कालीन नक्काशियां जैसे चारखाने, डोरिया, हंस मिथुन इत्यादि कालांतर में छीपियों के रूढ़िगत अलंकार बन गये ।