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Pracin Bharatiya Veshabhusha c13.s3.6

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c13.s3.6

Language
Hindi

c13.s3.6

अभाग्यवश हमें इस युग के संस्कृत साहित्य में इतनी सामग्री नहीं मिलती जिसके द्वारा हम उस युग के रहन-सहन आमोद-प्रमोद और वेश-भूषा का पूरा पूरा चित्र खींच सकें । कालिदास के काव्यों में वस्त्रों के छिटपुट उल्लेख हुए हैं पर सातवीं सदी की वेश-भूषा पर बाणभट्ट की 'कादंबरी' और 'हर्षचरित' से काफी प्रकाश पड़ता है । बाण भट्ट की सजग आंखों से उस युग की छोटी से छोटी बात नहीं छिपी है । जैन छेद सूत्रों के रचयिता कवि या साहित्यिक नहीं थे और इसीलिए उनके वर्णनों में रस की मात्रा कम है। फिर भी उनके रूखे वर्णनों और तालिकाओं में ऐसी सामग्री सुरक्षित है जो अन्यत्र नहीं मिल सकती ।