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Pracin Bharatiya Veshabhusha c13.s7.14

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c13.s7.14

Language
Hindi

c13.s7.14

१०—कायाणि—नीली रुई के सूत से बना कपड़ा । आचारांग की टीका२७ में इसकी व्याख्या है—'तथा क्वचिद्देशे इन्द्रनीलवर्णः कर्पासो भवति तेन निष्पन्नानि' अर्थात् किसी देश में इंद्रनील वर्ण की कपास होती है, उससे बना वस्त्र । यहां कोकटी जैसी किसी कपास से मतलब है । निशीथ२८ में इसकी व्याख्या है 'काकविसए काकजंघस्स जही मणी पडितो तटागे तत्थ रत्तानि जाणि ताणि कार्य भणंति, द्रुते वा काए रत्तं ।' काक विषय में काकजंघ की मणि जिस तालाब में मिलती है उससे रंगा वस्त्र अथवा रक्त की द्रुति से रंगा वस्त्र । इस व्याख्या का ठीक ठीक अर्थ समझ में नहीं आता ।