Pracin Bharatiya Veshabhusha c15.135
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c15.135
- Language
- Hindi
c15.135
वस्त्रागारिक, कपड़े की दुकान, ९९, १०१ वांगक, बंगाली दुकूल, ५०; ५६ वाताम्भोर, यत्फल, ३५ वागुर, एक तरह का जूता, १७२ वातपान, धोती में लम्बाई का किनारा, १८, २१ वातसक, वत्सदेश का कपड़ा, ५६ वालचित्त, नक्काशीदार झाल, ५१ वास्य, बुनकर, १५ वाषित, १५ वारबाण, जिरह, ५२, ५३, १६७, १६९, १९४ वारणसेय्यक, बनारसी कपड़ा, ३७ वावदंश, वृषदंश के रोमों के बने कपड़े, २९, ५९ वार्षिकसातटिक, ३५ वाह्लीक, वहां के कपड़े, २७, ४९ से, ५९ वाल, १५४ वासस, प्रायः दुपट्टा, १५; १७, १८ विद्रुचित्र, समुद्र पर की बुंदकियां, ४८ विणटिका, शिकारगाह कालीन, ३३ विगुष्फ, ऊंचा नीचा एहू, ४६ विचित्र पटोलक, पटोला, १५ विनंवत रज्जु, रस्सी, ४३; -सूत्रक, ४३ विरलिका दो सूती, १६८ विरलो, मलमल, १४ विलोव, एक तरह का कमरबन्द, ३९ विशाव, चीते का चमड़ा, १५३ विष्टु, भीतरी ओढ़, ४५ विवाह, कपड़े देने की प्रथा, १५७ विहित कम्पास, काशी की, ३० वीठ, हुक, ३५ वृषपुच्छक, एक तरह का समूर, ५० वृहिक्सूशिक, एक तरह का जूता, ४० वृहतिका, चादर, १५७ वेंटाइलिस टेक्सटाइलस, मलमल, ९४ वैभ्रत, झरको, ३६ वंजन, करधर, १९ वेश, १३२ वेश भूषा, —पुरुषों की मोहेंजोदड़ो में, ३ से;—स्त्रियों की, ५ से; राजाओं की, वैदिक युग, २१-२२; स्त्रियों की वैदिक युग, २२; दासों की, २३-२४; महाजनपदयुग, २५ से; बौद्ध, ३५ से; जैन साधु ३६-३७; ३७; फरवरी की ४१; मौर्ययुग, ४७ से; यूनानी लेखकों के अनुसार, ५१; यक्ष मूर्तियों की ५२, ५३; पक्षी की, ६२-६३; स्त्रियों की मौर्ययुग में, ६२-६३; पुरुषों की भरहुत में ६३ से; दक्षिण भारत की शुंगयुग, ६५; सिपाहियों की, भरहुत ६८; यक्षियों संघा, भरहुत, ६९; स्त्रियों की भरहुत, ६९ से पक्षी नक्काशीकारी, भरहुत, ७१; बहिणी, शुंग युग, ७३ से; साधु साध्वियों की, भरहुत, ७३; पुरुषों की, सांची, ७५ से; स्त्रियों की, सांची, ८१ से; पर शक प्रभाव, ८२; ब्राह्मणों की, ८७; दक्षिणी, ८७ से; पहली से तीसरी सदी, ९२ से; साहित्य में, १०२; रानी की, १०२; मंत्री पुरोहित इत्यादि की, १०२; दक्षिण भारत की, १०२- १०३; तामिलों की, १०३; सिपाहियों की, १०३; तामिल स्त्रियों की, १०३; गंधार की, १०४ से; राजपुरुषों की १०४; व्यापारियों की, १०७; सिपाहियों की, गंधार; १०७-१०८; शिकारियों, नौतिहरों, पहलवानों, ब्राह्मणों की, गं ार, १०८; स्त्रियों की, गंधार १०९; कुषाणयुग की, ११४ से; प्रमदियों की, ११४; घुड़सवार इत्यादि, ११४; शक राजाओं की ११७; स्त्रियों की, कुषाणयुग, १२२; ईरानी-स्त्रियों की १२५-१२६; नर्तकी, दक्षिण भारत की,— १२७; नर्तकी की, १२९; सिकंदरिया से आए व्यापारियों, की, १३७; सेवकों इत्यादि की, दक्षिण भारत, १३१; स्त्रियों की दक्षिण में, १३४ से, साधुओं की, १३५; सिपाहियों की, १३५; बच्चों की, १३५, सिले, गुप्तयुग में, १३८ से; सिक्कों पर, १३९ विदेशी दासियों की गुप्तयुग, १४१-४२; परिवर्तन गुप्तयुग, १४२; सिपाहियों की, गुप्तयुग १४३; गुप्त युग में इतिहास के साधन, १४३-१४४; संन्त-साधुओं की, गुप्त, १५० से; १५७ से; स्त्रियों की, १५८ से; राजा की, १५९; सिपाहियों की, १६०; राजकर्मचारी, १६१ से; शैव संन्यासी, १६२; जैन छेद सूत्रों में, १६२ से; जैन साधुओं की, १६३ से; जैन साधुओं को विदेशों में, १६६; जैन साध्वियों की, १६९ से; नाचने गाने वालों की, १७१ से; भिक्षुणियों की, १७५ से; इत्सिंग द्वारा वर्णित, १७५ से; युवानच्वांग द्वारा वर्णित, १७५; नागरिकों की, १७७; ठंढे प्रदेशों की, १७७; भिक्षुणियों की, १७६-१७७; कर्मचारियों की, १८२; सिपाहियों की, १८२; स्त्रियों की, १८३; पर विदेशी प्रभाव, १८३-१८४; अजंटा, १८४ से; गुप्त सिक्कों पर, १८४ से; संन्यासियों की, अजंटा, १८७; फीलवानों की, १९४ से; सिपाहियों की, १९५; शिकारियों की, १९५; ईरानी राजा की, १९७; घुड़सवारों की, १९७ से, कंचुकी की, १९८; मंत्रियों की, १९८; नागरिकों की, १९९; वादकों की, २०२; द्वारपालों की, २०३; भृत्यों की, २०३; साधारण जन की, २०६; ब्राह्मणों की, २०६; विदूषकों की, २०७; विदेशियों की, २१० से; मध्य एशिया वालों की, २११; सोरियनो की, २११ से; बच्चों की, २१४; स्त्रियों की, २१९ से; दासियों की, २२०; मध्यवर्ग की स्त्रियों की, २२१; आभीर स्त्रियों की, २२८; सांखिकों की, २२८