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Pracin Bharatiya Veshabhusha c15: अनुक्रमणिका

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c15

Language
Hindi

अनुक्रमणिका

c15.1

अंगरखा १०४, १५८

c15.2

अंजन-गंजन, छींट, १६५

c15.3

अंडज, शायद हंस दुकूल, १४५

c15.4

अंत्तनिबसनी, एक तरह का वस्त्र, १६९

c15.5

अन्तरवास, १७५, १७६; -वासक, २५, ३६

c15.6

अंतरीय, धोती, १५७

c15.7

अंशुक, महीन कपड़ा, १४८, १५३, १५४, १५७, १६९

c15.8

अंसबद्ध, कंधे की गाँठ, ४६

c15.9

अचकन, ११

c15.10

अचित्र, बिना नकाशी का, १६७

c15.11

अजविषाणबद्धक, एक तरह का जूता, ४०

c15.12

अजालिक, बिना जाली का कमरबन्द, १७०

c15.13

अजिन, बकरे की खाल, १२; ब्रात्यों द्वारा व्यवहार, २३; मृगचर्म, ३२, ३५; कंबोज के, ५९;

c15.14

अजिनविक्षेप, चमड़े के वस्त्र, ३५

c15.15

अजिनपवेणी, चमड़े का आस्तरण

c15.16

अट्ठपल्ल, झालर, ४६

c15.17

अड्ड एकासिक; काशी की अढ़ी, ३०

c15.18

अड्डकुटी, तिरछी सिलाई, ४५

c15.19

अत्क, अचकन, १८, १९

c15.20

अढ़ी, बनारस की, ३१

c15.21

अधिवास, चादर, १७, २१

c15.22

अधोंसुक, धोती, १५७

c15.23

अध्यक्षौमशुक, दुकूल में एक तार का बना ओर दो तार का ताना, ५५

c15.24

अनाहत, बिना कुंडी किया कपड़ा, ९६, १५४

c15.25

अनुत्पाद, बाना, २१

c15.26

अनुबद्ध, मोड़ों का अस्तर, ४५

c15.27

अनुवातकरण, बटाईदार सिलाई, ४५

c15.28

अनुवातपरिमंड, किनारे की छोर, ४६

c15.29

अपरान्तक, कोंकण का बना कपड़ा, ९७, ९९

c15.30

अपसारक, नेपाल की बनी पट्टी, ५३

c15.31

अफगानिस्तान, वहां के चमड़े और समूर, ६०

c15.32

अमलीकार, १७

c15.33

अमिला, कुंडी किया हुआ विशेष वस्त्र, १४९-१५०

c15.34

अरुक्काणि, अलंकार, २६

c15.35

अर्कतूल, सेमल की रुई, २१

c15.36

अर्धखल्लक, एक तरह का जूता, १७२

c15.37

अर्धजंघा, एक तरह का जूता, १७२, १८५

c15.38

अर्धोरुक, जांघिया, २३, १६९, २३०

c15.39

अलंकार, कपड़ों पर, २३०; काढ़ने का ढंग, १७; वैदिक युग के वस्त्रों पर, १६

c15.40

अवग्रह, बीच में चौड़ा बगल में संकरा वस्त्र, १६९

c15.41

अवप्रज्जन, ताने का निचला भाग, १७

c15.42

अविबीर-विथोरक, चौर छोड़कर, ९३

c15.43

अस्सत्थर, घोड़े का आस्तरण, ३३

c15.44

आद्गण, चमड़े के वस्त्र, १४६

c15.45

आइज्ण, अजिन, १५०

c15.46

आहत्य, वेशभूषा, १३९

c15.47

आकृण्वंति, कातना, २१

c15.48

आच्छादन, वस्त्र, १५४

c15.49

आजक, पश्मीना, १४६

c15.50

आंपरांतक, कोंकण का सूती का कपड़ा, ५६

c15.51

आभरण-विचित्र, नकाशी, १५३

c15.52

आभरणानि, नकाशोदार कपड़े, १५३

c15.53

आयाणि, पश्मीना, १४६

c15.54

आयोग पट्ट, घुटने बांधने का वस्त्र, ३५

c15.55

आरोका; अलंकार विशेष, १६, २१

c15.56

आरोह, हिमालय के चमड़े, ४८

c15.57

आर्गारिटिक, उरैयूर की मलमल, ९४

c15.58

आविक, भेड़ के ऊन के कपड़े, १०, ५०

c15.59

आवेसन खित्थक, कैंची का खाना, ४३

c15.60

आस्तरण, ३२; चांदनी, ५७-५८

c15.61

आहत, कुंडी किया वस्त्र, २१

c15.62

इषियप, यू-ची स्त्रियां, १४१ उक्त, साही की चूभन, १७० उट्ठारिण, ऊंट के चमड़े, १५३ उट्ठोवान कंबल, २९, ६० उत्तरासंग, चादर, ३५, ३६, १५७, १७५, १७६ उत्तरीय, दुपट्टा १५७, १६०, १६२, १७१ उद्दलोमी, रोएंदार कम्बल, ३३ उद्वा, ऊदबिलाव के चमड़े, १५१ उपधान, तकिया, १६८ उपनहन, धोती अथवा जूता, २१ उपवसन, शायद दुपट्टा, १८, १९, १७८ उपसंव्यान, धोती, १५७ उपानह, सूअर के चमड़े का जूता, २०; १७८ उपाहन, जूता ४० उमा, अतसी, २८ उरपोत, शायद कुर्ता, २३ उल्लिखित, कपड़े पर खड़ी का निशान, ४४ उष्ट्रकंबल, ऊंट के बाल का कंबल, ९७ उष्णीष, पगड़ी, १९-२०; बाँधने का ढंग, २१, २३; दासों की, २३; -रत्न, ८९ ऊनी वस्त्र, वैदिक युग में, १० से; २६, २८-२९; बनारस के, ३०; ३२, ५२, ५३ से, ९६, ९७, १४०, १७५ ऊर्णवापक, ऊन बिनने वाले ९७, ऊर्णा, ९६ ऊर्णावंती, सिन्ध नदी, १० एकपलांसिक, एक तल्ले जूते, ३९ एकतल, एकतल्ला जूता, १७२ एकंतलोमी, कंबल, ३३ एकपुट, एकतल्ला जूता, १७२ एरगू, एक तरह की घास, ३१ एकांशुक, एक सूती दुकूल, ५५ ऐवेय, भेड़ की खाल, २९; ऊनी कपड़े, ५२ ओकिरति, छोर निकालना, ४६ ओढ़नी, भरहुत, ६९, ७१, ७३; सांची, ७५; ८१-८२, ८९, १२७; अमरावती, १३५

c15.63

ओतु, बाना, १५, २१ ओवट्टिमकरण, मोड़कर सिलाई, ४४ ओसणज्जिओ, जैन साध्वियों का एक विशेष वस्त्र, १७० ओर्णिक, ऊनी कपड़े, १६३; -कल्प, जैन साधुओं के, ३६ औष्ट्रिक, ऊंट के बाल के बने कपड़े, १६३

c15.64

कवर्ग

c15.65

कंकट, बख्तर, ५७ कंचुक, ३६, भरहुत-सांची में, ६८; ८३, ८५, ९०, ९३, १०२, १०३, १०४, १०७, १०९, ११४, ११७, ११९, १२५, १२७, १२८; अमरावती में, १३५, १४०; १४२, १४३, १५६, १५८, १६०, १६१, १६२, १६८, १७०, १७१, १७५, १८२, १८४, १८६, १८७, १९१, १९५, १९८, २०२, २०६, २०७, २१०, २११, २१४, २१८, २१९, २२०, २२१, २२२, २२४, २२५, २२६, २३० कंठोर, १३२, २०६ कंडुसकरण, जोड़, ४४ कंडूहप्रतिच्छादन, खुजली ढांकने का वस्त्र ३५ कंतित्वा, कातकर २७ कंबल, १०; बौद्ध साहित्य में, २८-२९; समारात- के ३०; ५०-५१, ५८ कंबु, शंखाकार पगड़ी, ७९ कंबोज, वहां के कीमती दुशाले, ५९; स्वात के ६०; सूक्ष्माणि, पतले, ९७; ९९ १५७, १५५, १६२, १६६, १६८; यहां के कपड़े, ४९, ५९ कटवानक, मोटी चादर, ५४ कठिन, जवाहरदार आस्तरण, ३३ कठिन, फ्रेम, ४३, ४४ कणग, १५२; -कंत, १४८; -कंतिय, सुनहरे किनारों वाला वस्त्र, १५२; -तड्याणि, जरदोजी, १५२; -खत्तिय, सुनहरे कान वाला वस्त्र, १४५; -चित्त, सुनहरे काम वाला वस्त्र १४८; -फुल्लिया, सुनहरे फूलों वाला वस्त्र १५२-१५३; -फुसिय, हल्का सुनहला काम, १५२; -यफ, वस्त्र के किनारे पर सुनहला कान, १५२; -विचित्त, १४८

c15.66

कताई-बुनाई, मोहेन जोदड़ो, २-३; वैदिक साहित्य, १५

c15.67

कवमितिका, सूत, ५२

c15.68

कदली, एक तरह का समूर जो कंबोज से आता था; ४९;—मृग २९, ३३;—पदरप्रवत्समरम, उसके खाल से बना कंबल, ३३;—झोकात्ति, उसके समूर, ५९

c15.69

कनीकार, ५१

c15.70

कपास, सर्वप्रथम मोहेन जोदड़ो में, ३; इतिहास-२६-२७; बनारस के आस पास खेत, २७; बनारसकी, ३०; ५८; सूतने की क्रिया, ६३, ६६

c15.71

कप्पास, —पोधन-धनुष; रुई धुनने की यन्तुही, २७, —रक्खिका, कपास का खेत जोहने वाली, २७

c15.72

कवस, जूता, १७८

c15.73

कफुस्सा, पूरे पैर का जूता, ११७

c15.74

कबा, १७७, २१४, २१५

c15.75

कमरबंद, ३८; मौर्य-शुंग युग, ६२-६३; दक्षिण-भारत ६५; भरहुत ६३, ६१, ७१; सांची, ७५; अमरावती, ७३; ८५ ८६, १०३, १०४, १०८, ११४, १२७, १२६, १२२, १२७, १२६, १३२, १३४, १३५, १६१, १६२, १६७, १७०, १७१, १७६, १७८, १८२, १८३, १८५, १८६, १८७, १६०, १६८, १६६, २०२, २०३, २०६, २१४, २१६

c15.76

कथौड़, १७७, २१४, २१५

c15.77

करघे, उसके भाग, ३६

c15.78

कर्णिकानिभचित्र, समूर पर की लूथियां, ४६

c15.79

कर्पासपिचु, कोमल १३

c15.80

कर्पासवाट, कपास का खेत, ६३

c15.81

कलम, कल्फ, १६५

c15.82

कलमितिका, शालब कुत्ताह, ५२

c15.83

कलाबुक, एक तरह का कमरबंद, ३८

c15.84

कलिंग, वहां के कपड़े, ६० से, वहां के बुनकर ६१, ६३,६४; कलिंगदेश का बना सूती कपड़ा, ५६ ; -प्रावार, वहां की चादर, ६४

c15.85

कल्पद्रुम, ६६

c15.86

कवांश, एक तरह का जूता, १७८

c15.87

कश्मीर, २,१३; में शाल बुनने की प्रक्रिया, ५१; ६६, १२५

c15.88

कसीदा, वैदिकयुग में, १६,१७, २६, १५१, देखिए पेदांस

c15.89

कांडपट, ५३

c15.90

कांतातावक, एक तरह का समूर, ४८

c15.91

कापिस, एक तरह का जूता, १७८

c15.92

कामानि, शामब कोफटी, १४१, १५०

c15.93

काय-प्रौंछन, गमछा, १७५

c15.94

कायबंध, कमरबंद, ३५; तरह तरह के, ३८-३६

c15.95

कारखाने, कपड़े बुनने के, ५६, ५७

c15.96

कारीगर, बौद्ध-जैन साहित्य में उनका स्थान २६ ; उनका इनाम, ५७

c15.97

काकुक, बुनकर, १०१

c15.98

कार्पास, वैदिक साहित्य में, १४

c15.99

कार्पासिक, कपास बेचने वाले, २६

c15.100

कालवेतन, बुनकरों का नियत पारिश्रमिक, ५७

c15.101

कास्तिका, एक तरह का समूर, ४६

c15.102

कालीन, २६, ३२, ३३,

c15.103

काशिक, काशी का कपड़ा ५६; वस्त्र, ६७, ६६; जंतु, ६७

c15.104

काशी, वहां के वस्त्र, ३०-३१; कुसम ३०; क्षौम-के लिए प्रसिद्ध, ५५; वहां के धोती दुपट्टे, १०२

c15.105

कासिक, — सूती वस्त्र, बनारसी कसीदा, ५१

c15.106

कासीय, काशी के वस्त्र, ३०

c15.107

किट्ट, एक तरह का ऊनी कपड़ा, १६४

c15.108

कीटज, रेशमी कपड़ा २७, ५६

c15.109

कीडेय, रेशमी कपड़ा, १४८

c15.110

कुंकुमरक्तचित, केसरिया वस्त्र, १६५

c15.111

कुत्ति, बगल, ४४

c15.112

कुचेलक, ५३

c15.113

कुतुप, एक तरह का कंबल, ६७, १६४, १६६

c15.114

कुतक, बड़ा कालीन, ३३

c15.115

कुरता, १६,२३,२६,१७८,२१६

c15.116

कुलाह, १०४, ११४, १३२, १४२, २१८

c15.117

कुविद, बुनकर, ६३

c15.118

कुश, शायद रेशम, २३ कुशचीर, कुश से बने कपड़े, ३१, ३५ कुसि, तिरछे बल सिलाई, ४५ कुसूलक, घाघरा, १७६ कूर्पासिक, चोली, १६, १५८, १६१, १६१, १९४, १६५, १६८, २०२, २०६, २१६ कृतप्रमाण, ठीके पर बुना कपड़ा, ५७ कृमिजात, रेशम, ५८ कृमितान, रेशम, ५७ कृमिराग, लाल रेशमी कपड़ा, १४८ कृष्णवड्ड, काले किनारे, २४ कृष्णसंवास, ब्रात्यों का काला कपड़ा, २३ कृष्णाजिन, यज्ञ में व्यवहार, ११-१२, केचुलक, ग्वालों का कंबल, ५२ केशप्रतिग्रह, १७५ केसकंबल, ३५ कोजव, थुलमा, ३४ कोटंब, १५६ कोट, ९९, १०३, १०९, ११०, १६१, १८५, १९०, १९४, २०२, २०७, २१४, २१५ कोटुंबर, शायद पठानकोट का कपड़ा, ३१, १५६ कोठपरिमंडल चित्रा, समूर पर गोल घिसियां, ४९ कोथव, रोएंदार कंबल, १५०, १६८ कोशकार, एक प्रदेश जहां रेशमी कपड़ा बनता था, ६१ कोशा, एक तरह का जूता, १७२ कोशिकारक, नक्काशीदार रेशमी कपड़ा, २५ कोसेय्य, रेशमी कालीन, ३३ कोटुंबर, कोटुंबरदेश का कपड़ा, ३१ कौमकेस, गोपिक का यूनानी रूपांतर, ३२ कौपीन, ३, ३६, १५५, १६२ कौशिक, रेशमी कपड़े, ६०-६१ कौशिकार, रेशमी वस्त्र, १६४ कौशेय, २५-२६, ५६, ९५, १४६; -प्रावार, ३७ क्रमनिका, जूते, १७३ क्रोडज, रेशमी कपड़ा १४५ क्षणोत्सविक, उत्सवों पर पहने जाने वाले कपड़े, १६३

c15.119

खोभ, अतसी की छाल के रेंगे से बना कपड़ा, १३, १४, २६, २८; बनारस का, ३०; ५५, ५८, ९७, १४७, १५७, १६२; -कल्प, जैन साधुओं का एक वस्त्र ३६; - वासस, २८; -साटो, ३७ खंड-संघात्य, पट्टियों को जोड़कर बने रूमाल, ९१ खचित, बुने अलंकार, १७, ५०-५१ खपुसा, एक तरह का जूता, ३९, १७२, १७९, १८५ खल्लकबध, एक तरह का जूता, ३९; खल्लका, १७२, १९८ लोमिय, खोम, १४५, १४६ खोव, १८६, २०६ गंडोपधान, तकिया, १६८ गंघार, भेड़ों के लिए प्रसिद्ध, १०, ऊनी वस्त्र के लिए प्रसिद्ध, २७ गज्जफल, एक तरह का कपड़ा, १५० गात्रिका, शाल, १५८ गिधेय्यक, कालर, ४५ गुलक, तशनी, ३५ गूल, सूत का गोला, २७ गेंजेटिक, डाके की मलमल, ६१, ९४ गोचर्म, पहनने की वैदिक प्रथा, ११ गोजक, बकरे के बाल का आस्तरण ३२ गोपालकंपुक, १६८ घंटिका, एक तरह का अलंकार, १५३ घघरी, २३, १०३, १०८, १६७, २१२, २२०, २२४, २२५, २२८, २२९, २३१

c15.120

चवर्ग

c15.121

चंडातक, जांघिया या घघरी, २३, १५८, १६१, २२० चंद्रलेखा, एक अलंकार, १५३ चंद्रोत्तरा, चित्तीदार समूर, ४९ चट्टी, २० चतुरभिका, चादर, ५४ चतुरस्रकवान, सादा दुकूल, ५५ चतुकर्णक, धोती बांधने का एक तरीका, ३८ चप्पल, ३९, ४०, ४१, १०४, १९५ चमई, वन्य पशुओं के, ३१-३२; ५३-५४; ४८, ५०; अर्थशास्त्र में, ५०; ५८, ६० चर्मकार, ४० चर्मपट्ट, ३९ चलन, जांघिया, २३ चलनिफा, छोटी साड़ी या लहंगा, १६९ चहार आईना, १६१ चादर, मोहें जोदड़ो, ३; १७, २२, २९, ३४, ५४, ५९; ९७, १०४, १०७, १०८, १०९, १११, १२४, १२९, भरहुत में, ६९, ७३; १५१, १५५, १५७, १५९, १६४, १६४, १६८, १७५, १९८, २०२, २०६, २१९, २२०, २२१ चारखाना, १४४ चित्तक, रंगीन कालीन, ३३ चित्रकम्बल, अलंकृत कालीन, २९ चित्रपट, नकाशीदार कपड़ा, १५५, १५६ चित्रा-विरली, जामदानी, ९४ चिलिमिका, बिस्तरपोश, ३३ चिल्टा, १६१ चीन, रेशमी कपड़ा, ५९, ६०, ९५ चीनचोलक, जिरहबस्तर, १६१ चीनपट्ट, चीन का बना रेशमी कपड़ा ५६, ९६ चीनांशुक, १४८, १४९ चीनांसुम, २७ चीनासि, चीन देश के समूर, ४९; कपड़े, १०१ चीवर, २८ चूनरी, ९९, १५९, १९४ चेलक्खेप, २०७ चैल, वस्त्र, १५४ चोडक, कंचुक, १०२ चोलपट्टी, ३९ चोली, ३६, १२५, १५८, १५९, १६१, २२०, २२४, २२५, २२९, २३० छन्नवीर १३५, २१८ छवडुस्स, कफन, ३५ छाल, उसके वस्त्र, ३१ छींट, ९९ जंघिम, १६३ जंघिय, ऊनी कपड़ा, १४५ जंघा, एक तरह का जूता, १७२, १८५ जंघात्राण, पाजामा, ४५ जाकेट, १७५, २२०, २२४ जांघिया, २३, ८५, १०८, १२९, १३२, १३५, १४०, १४३, १८५, १८६, १९९, २०६, २२१ जांघेयक, जांघ पर सिलावस्त्र, ४५ जातीपट्टिका, शायद जामदानी, १५५-१५६ जामदानी, ९४, ९९ जामा, १४२, १८५ जोर्ज, जीन, १६४ जूते, २०, २४, ३९, ४०, ८५, ८६, ११७, १७१ से, १७८-१७९, १८५, १९०, २१५ जोणिय, यवनी, १४१

c15.122

टवर्ग

c15.123

टसर, एक तरह का मोटा रेशमी कपड़ा, १४ टोपी, मोहें जोदड़ो में, ५, ७; भरहुत में ५८; सांची में, ७९; ८१, ८२, ८५, १०३, १०५; गंधार में १०९; ११४, ११७, ११९; मथुरा में ११९, १२०; १२५; दक्षिण भारत, अमरावती, १३१-१३२; १८४, १८४, १८५, १८७, १९०, १९१, २०२, २०३, २०७, २१०, २११, २१४, २१५, २१६,-२१७, २१९, २२०, २२१, २२२, २२४, २२५, २२८ डेड्डुब्भक एक तरह का कमरबन्द, ३८ डोरिया, १४४; मथुरा की, १५५

c15.124

तवर्ग

c15.125

तंतक, करघा, ३६ संतु, सूत, १५, २१; -वाय, बुनकर, २६; -विच्छिन्न, जालीदार किनारे वाला शाल, ५१-५२ तंत्र, ताना, १५; -क, १५४; -वायक, बुनकर, १३ तन्ती, ३५ तलिच्छदक, पलंगपोश, ५३ तसरिका, ताना, १३ तहमद, ३, १७, ३२, ३५ ताड़पत्र, सीयन की सिधाई के लिए निशान, ४३

c15.126

ताम्रलिप्ति, वहां के कपड़े, ६० से, १५६, १६७ तार्य, एक तरह का कपड़ा, १४ तालवंतक, धोती बांधने का तरीका, ३८ तित्तिरपट्टिक, एक तरह का जूता, ४० तिपटल, तितल्ले जूते, ३९ तिरीट, छाल से बने कपड़े, १५; —पट्ट, १५३, १६४ तोलीकार, ५१ तुंडिचेल, शायद तोंडिदेश का कपड़ा, ९६ तुण्णाग, दरजी, २६ तुल, सिलावस्त्र, १६५ तुरुगास्तरण, ५२ तूल, ३६ तूलकद, रुई के कपड़े, २६, १४६ तूलपुण्णिक, एक तरह का जूता, ४० तूलि, तकिया, १६८ तूलिका, रजाई, ३३ तूष, छोटा छोर, १८; २९; —आयात, झालरदार तकिया, २१ त्र्यंशुक, तिसूती दुकूल, ५५ दंडकठिन, फ्रेंस के डंडे, ४३ दडिकरण, दोहरी सीवन, ४४-४५ दशा, किनारा, १५४ दशिका, किनारेदार, १६५, १६७ दक्षिणापथ, वहां चमड़े के व्यवहार की अनुमति, ३२ दाढिकालि, धूली चादर, १६८ दामतूषाणि, बटी छोरें, २३ दामिली, तामिल स्त्री, १४१ दिव्यसुधा, मांडी, ९३ दुकूल, ५४-५५, ६०; उस पर बूंदी, ५८; ९६, ९७, १४७, १४८, १५३, १५७, १५९; —घूंघट, ४१ दुपट्टा, ५, १७, ३७, ३८, ६२, ६३, ७५, ८३, ८९, १०२, १०४, १०७, १०९, ११४, १२२, १२९, १३२, १३४, १३५, १५६, १५७, १६८, १६९, १७१, १८४, १८६, १८७, १९०, १९१, १९८, १९९, २०६, २०७, २१०, २२१, २२९ दूर्श, शाम्ब चादर, १३

c15.127

दूष्य, गुस्सा, ९६ दूष्य, १६८ दुस्सा, गुस्सा, २९; पट्ट, ३९; वेणी, ३९; —पट्टी, ३९ दूकान, कपड़ों की, १०१ देशकाल परिभोग, देशकाल के अनुसार कपड़े, ५६ देशराग, रंगीन कपड़े, १४९ दोरिक, बजाज, २६ द्रापि, कोट्नुमा वस्त्र, १९ द्वादश गाम, चमड़े जहां से आते थे, ४८ द्विपटल, दो तल्ले जूते, ३९ द्विसंहितानि, दोहरा चमड़ा जो जात्य पहनते थे, १२ द्वयंशुक, दो सूती दुकूल, ५५ धुलाई, ३४, १५५ धूस्सा, २९, ९६ धोती, ३, २२, २४, ३६, ३७, ३८, ६२, ६३ से, ६५, ७५, ८७, ८९, १०२, १०७, १०४, १०७, ११४, १२७, १३२, १३५, १३९, १४३, १५६, १५७, १५८, १५९, १६०, १६४, १६९, १७५, १८२, १८३, १८४, १८५, १८६, १८७, १९०, १९५, १९९, २०२, २०३, २०६, २०७, २१०, २१८, २२८ धौतपट्ट, मुस्र रेशमी कपड़ा, ९५ नखतक, नखरा, ३४ नमदा, ३०, ३४, ५९, १४५ नलकार, बेंस बुनने वाला, २६; —शिल्प, २६ नलतुला, हरामायल समूर, ५० नाग, कलिंग के बुनकर, ६१ नितोल, चादर, १५५ नित्यनिवसन, रोज पहनने के कपड़े, १६३ निमज्जनिक, नहाने के बाद पहनने के कपड़े, १६३ निरुपहत, बिना छोर का कपड़ा, १६५ निवसन, १७५, १७६, १७८ निबीत, १४७ निवीवन, चटाई, १७५ निष्प्रवाणि, तुरत करघे से उतरा कपड़ा, १५४ नीवि, लंगोटी १७; १८ २१ २२, १६१

c15.128

नीलकंबल, १६७ नीलमिताहसण, नील गाय का चमड़ा, १५१ नीजार, लबादा, १५८ नेपथ्य, वेशभूषा, १३९ नेपाल, वहां के वस्त्र, ५३, १६७ नेबुला, पतली मलमल, ९४ नेथत्थ, नेपत्थ्य, १४२ नेत्र, रेशमी कपड़ा, १५७; —पट्ट, १६०; —सूत्र, १५९

c15.129

पवर्ग

c15.130

पंसुपटिक, कपड़े रखने की टांड, ४४ पंडुकंबल, गंवार का लाल दुशाला, २९ पक्कणी, परगना की स्त्री, १४१ पखंगाणि, पश्मीने, १५३ पगड़ी, दासों की, २३; २४, ३७; अटपटी, ६२; भरहुत में, ६३, ६५, ६७, ७१; सांची में, ७५, ७७, ७९; ८२, ८७, ८९, ९०, १०२, १०४, १०५, १०७, १०८, ११७, १२२; अमरावती, १२९, १३१, १३२; स्त्रियों की, अमरावती, १३४; १४२, १६०, १६२, १८२, १८५, १८६, १८७, १९५, १९८, १९९, २०२, २०६, २११, २१९ पटका, ३८, ६३, ६९, ७५, ७७, ८५, ११५, १२२, १३४, १३५, १४२, १८७, १९९, २०७, २१८ पटलक, सुगंधित वस्त्र, १६५ पटलिका, फूलदार कालीन, ३३ पटोलक, ९५ पटोला, ९५ पट्ट, २८, १४८, १५३, १६९; —गार, रेशम बुनने-वाले, २६ पट्टज, रेशमी, २७, ५९ पट्टांशुक, ९५ पत्ता, किनारियां, ४६ पत्तंगिनी, चट्टी, २० पन्नोणं, पटोरा, ५५, ६१, १४९, १५३ पनुन्न, पन्नोणं, १४९ परिधान, धोती, १७, १५७ परिमंडलकरण, बगल की सिलाई, ४५ परिवार, कमरबन्द, १७१ परस्तोभ, बड़े कंबल, ५३ पर्य्य कबंध, ३५ पर्य्यस्तक, ८१, १६७, १७० पर्य्याणहत, चादर; १८, १९, २१ पर्यांस, बाना, २१ पलंगपोश, ५३ पलिका, ऊनी कालीन, ३३ पश्मीना, ३७, ५७, ५९, ९६, १४७, १४६, १६४ पांडुदुकूल, ९७, १२५ पांडव, ऊनी कपड़ा, १३, २१ पांडुदुकूल, ३५ पाजामा, ३, ५४, १०४, १३२, १४२, १४३, १६०, १७१, १८५, १९१, १९८, २०२, २०७, २१०, २११, २१४, २१५ पावलाणि, आभरण, १५३ पादुका, ४०, ४१, १६२, १७९ पारसी, १४१ पारावताक्षि, समुद्र पार के कपड़े, १५६ पालिगुंठिम, एक तरह का जूता, ३९ पावराणि, चादर, १५० पावारिक, चादर बेचने वाले, ६१ पासक, सुरु, ३५ पिंजित, बुनना, १५४ पिंल्लक, फेम के खूंटे, ४३ पुंड्र, वहां के कपड़े, ६० से पुटक, एक तरह का जूता, १७२ पुटकबद्ध, एक तरह का जूता, ३९ पुलकबंध, चूनरी, १५६, १५९, १६४ पुलिंद, १४१ पुष्पपट्ट, फूलदार कपड़ा, २७, ९९, १५६ पूरिका, सिलाइ चादर, १६८ पूल, एक तरह का जूता, १७८, १७९ पेल, फूलो, १५४ पेशकारी, कसीदे का काम करने वाले, २७ पेशन, कसीदे का काम, १७

c15.131

पेशांसि, पेशवाज, १७ पेस, कसीदा, १५१ पेसकारसिप्प, कसीदागरी, २६ पेसलाणि, पदमीने की चादरें, १५१ पोत्तग, शायद ताड़पत्र के बने कपड़े, १४५, १६३ पौंडरीक, पुंड्र का बना पटोरा, ५५ पौंड्र, क्षौम के लिए प्रसिद्ध, ५५;—क, पुंड्रका दुकूल, ५५ पौलस, बीस देश की स्त्रियां, १४१ प्रघात, नाभिसे लटकता छोर, १८, २१ प्रच्छदपट, चादर, १५५ प्रतिकर्म, वेशभूषा, १३९ प्रतिग्रह, अंगुस्ताना, ४३ प्रतिधि, स्तनपट्ट, १८, १९ प्रतोद, चाबुक, २३ प्रत्यस्तरण, आसन, ३५ प्रपदीन, अंगरखा, १५८ प्रवयण, ताने का ऊपरी भाग, १७ प्रसाधन, १३९ प्राचीनतान, आगे खींचा ताना, १५, २१ प्रावर, चादर, ६१;—क, ५४, १६५ प्रावरण, परदे, ५७, ५८;— पोतु, १०२ प्रावार, ५९, १५७ प्रावारक, थुलमा, ९७, १६८ प्रावृत, १४७ प्रैंयक, एक तरह का समूर, ४८ फलक, ९७, ९९;—चीर, फराटी से बने कपड़े, ३१, ३५ फलनिर्व्वत्ति, कारीगरी के अनुसार वेतन, ५७ फाल, फल के रेशे से बना कपड़ा, १४४ फालिय, स्वच्छ कपड़ा, १५० फांसुका, ६३ फुट्टक, छींट, ९७, ९९, १०१ बंध, जूते का बंद, १७३ बंधन, जोड़ना, ४४ बम्बर, बर्बर देश, १४१ बरासी, बरस की छाल का कपड़ा, १२-१३, १५४ बहन्न, केहुनी पर लगे टुकड़े, ४५-४६ बहिनियसनी, जैन साध्वियों के पहनने का एक तरह का कपड़ा, १६९ बादर, सूती कपड़े, १५७ बालकंबल, ३५ बाबेरुजातक, १, २ बिसौ, एक तरह का चमड़ा, ४८ बूट, ११७, १४०, १४२, १४३, १७८, १८५, १८६, १९४, १९८, २०७, २१०, २१४, २१५, २१९ बोंडज, सूती कपड़ा, १४५ भंगिम, भंगेला, १४५, १६७, १६४ भांगिक, भंगेला, ३१ भांडवेतन विनिमय, सूत लेकर मजदूरी, ५८ भाष्यक, मोटी चादर, ५४ भिगिसी, नैपाली कंबल, ५३ भेवजपरिष्कार चीवर, १७५ मंडल, गोल सिलाई, ९५ मज्जार, एक तरह का तृण, ३१ मणिवर्म, जिरहबस्तर, १०२ मणिनिम्भोदकवान, पालिशदार दुकूल, ५५ मदुरा, वहां का चमाजा १०९ महबोन, एक तरह का कमरबन्द, ३८ मत्स्यवालक, धोती बांधने का एक तरीका, ३८ मध्य एशिया, वहां के कपड़े, ५९, ६० ममूस, दरजी, १५ मलमल, ढाका की, ६१; ९३; रोम में, ९४ मलय, रेशमी वस्त्र, १४८ मल्लककाबद्ध, जांघिया, १६९ मल्लचलन, जांघिया, १६९ मसालिया, मसलीपट्टम की मलमल, ९४ मसूरक, गोल तकिया, १६९ मसुण, चिकना वस्त्र, १६५ महाधन, कीमती वस्त्र, १४९ महाबिसौ, एक तरह का चमड़ा, ४८ मागधिका, मगध का बना पटोरा, ५६

c15.132

माथुर, मधुरा का बना सूती कपड़ा, ५६ मारोकोकोरम नासा, चश्म, ९६ माहिषक, माहिष्मती का कपड़ा, ५६ मिरजई, १६१, १९४, १९५, १९८ मुंडपूल, एक तरह का जूता, १७९ मुकुट, १११, ११४, १८४, १८७, १९०, १९१, १९९, २०३, २२७, २२८, २३० मुखपोतिका, मुखपोंछने का रूमाल, १७५ मुखप्रोंछन, रूमाल, १७५ मुरंडी, १४१ मूल्ययुत, मूल्य के अनुसार वस्त्र भेद, १६६ मूषकलोम, १६४ मृगरोम, १६३, १६४ मेंडविषाणवर्द्धिक, एक तरह का जूता, ४० मोघसूत, लंगर, ४३ मोजे, १९०, २११, २१९ मोंगरवे, मलमल, ९४ मोरंग, एक तरह का तृण, ३१ मौरविषहिनिव्रित, एक तरह का जूता, ४० मौलौबौन, शायद मलमल वस्त्र, ९४ मौलिपट्ट, पगड़ी, १०२

c15.133

यवर्ग

c15.134

यथाकृत, असंसिले कपड़े, १६४, १६५ यमली, धोती दुपट्टा, १०२ योक्त्र, कमर में बांधने की रस्सी, २२ योतपट्ट, ६९, १५८ रंकु, पश्मीने का बकरा, ५९ रंग, पश्मीने का बकरा, १४५ रंग, कपड़े रंगने के, ३४, ५८, १७७ रफू, ४४, ४६; —कारी, ४६ रल्लतक, कंबल, १५३, १५५ रसना, वस्त्र पर पहनने की प्रथा, २२ रांकव, पश्मीना, २०, ५७, ५९, १४५, १४६, १४७; —कंट, ५९, १४५ राजद्वारक, राजद्वार के कपड़े, १६३ रूमाल, ५१, ७२, ८५, ९६, १०८, ११९, १३२, १३५, १४७, १६०, १६५, १९४, २०२, २०३, २०६, २११, २२१, २२४, २२८, २२९, २३० रेक, एक तरह का सिला कपड़ा, १७७ रेशम, २३, २६, ५७, ५८, ५९, ६७, १०१ रेशमी कपड़े, २७, ३०, ५५, ५६, ६०, ६१, ९५, ९९, १५५-५६, १७५-७६ रेशमी बुनकर, मंदसोर के, १५५ रोमावर्तक, चादर, ५४ लंगोट, २६ लंगोटी, ५, १७, १९५, १९८ लंबरा, एक तरह की चादर, ५४ लहंगा, १५८, २१२, २२४, २२५ लालातंतुक, १५७ लासिय, १४१ लेखा, समूर पर की धारियां, ४८ लोहित वासस्, लालवस्त्र, २३ लौसिय, १४१ वंग, वहां के कपड़े, ६० से वन्यानि, वाणंवर, १५३ वर्टरिणापाद, एक तरह का जूता, २० वह्न, करघे की डोर, २६ वहग, टसर, १५३ वन्य शिरस्त्राण, ५२ वयति बुनना, २१ वर्णक, रंगीन कंबल, ५२ वर्णयुत, रंग के अनुसार वस्त्रभेद, १६६ वर्षवारण, बरसाती, ५३ वलक्ष, सफेद चमड़ा, १२ वलिस, हुक, ४२ वलूकांतानि, लाल किनारे, २३ वल्कल, ३१, ९९, १३५, १४४ वसिति, किनारा, १५४ वसन, १५, १५४ वस्त्र, १५, २०, २१, २२, ३१, ३२ से; पर अलंकार, ३६; वस्त्रविर्जनसाधन द्रव्य, कपड़े रंगने के साधन, ५८; १०१; —राग, १०२

c15.135

वस्त्रागारिक, कपड़े की दुकान, ९९, १०१ वांगक, बंगाली दुकूल, ५०; ५६ वाताम्भोर, यत्फल, ३५ वागुर, एक तरह का जूता, १७२ वातपान, धोती में लम्बाई का किनारा, १८, २१ वातसक, वत्सदेश का कपड़ा, ५६ वालचित्त, नक्काशीदार झाल, ५१ वास्य, बुनकर, १५ वाषित, १५ वारबाण, जिरह, ५२, ५३, १६७, १६९, १९४ वारणसेय्यक, बनारसी कपड़ा, ३७ वावदंश, वृषदंश के रोमों के बने कपड़े, २९, ५९ वार्षिकसातटिक, ३५ वाह्लीक, वहां के कपड़े, २७, ४९ से, ५९ वाल, १५४ वासस, प्रायः दुपट्टा, १५; १७, १८ विद्रुचित्र, समुद्र पर की बुंदकियां, ४८ विणटिका, शिकारगाह कालीन, ३३ विगुष्फ, ऊंचा नीचा एहू, ४६ विचित्र पटोलक, पटोला, १५ विनंवत रज्जु, रस्सी, ४३; -सूत्रक, ४३ विरलिका दो सूती, १६८ विरलो, मलमल, १४ विलोव, एक तरह का कमरबन्द, ३९ विशाव, चीते का चमड़ा, १५३ विष्टु, भीतरी ओढ़, ४५ विवाह, कपड़े देने की प्रथा, १५७ विहित कम्पास, काशी की, ३० वीठ, हुक, ३५ वृषपुच्छक, एक तरह का समूर, ५० वृहिक्सूशिक, एक तरह का जूता, ४० वृहतिका, चादर, १५७ वेंटाइलिस टेक्सटाइलस, मलमल, ९४ वैभ्रत, झरको, ३६ वंजन, करधर, १९ वेश, १३२ वेश भूषा, —पुरुषों की मोहेंजोदड़ो में, ३ से;—स्त्रियों की, ५ से; राजाओं की, वैदिक युग, २१-२२; स्त्रियों की वैदिक युग, २२; दासों की, २३-२४; महाजनपदयुग, २५ से; बौद्ध, ३५ से; जैन साधु ३६-३७; ३७; फरवरी की ४१; मौर्ययुग, ४७ से; यूनानी लेखकों के अनुसार, ५१; यक्ष मूर्तियों की ५२, ५३; पक्षी की, ६२-६३; स्त्रियों की मौर्ययुग में, ६२-६३; पुरुषों की भरहुत में ६३ से; दक्षिण भारत की शुंगयुग, ६५; सिपाहियों की, भरहुत ६८; यक्षियों संघा, भरहुत, ६९; स्त्रियों की भरहुत, ६९ से पक्षी नक्काशीकारी, भरहुत, ७१; बहिणी, शुंग युग, ७३ से; साधु साध्वियों की, भरहुत, ७३; पुरुषों की, सांची, ७५ से; स्त्रियों की, सांची, ८१ से; पर शक प्रभाव, ८२; ब्राह्मणों की, ८७; दक्षिणी, ८७ से; पहली से तीसरी सदी, ९२ से; साहित्य में, १०२; रानी की, १०२; मंत्री पुरोहित इत्यादि की, १०२; दक्षिण भारत की, १०२- १०३; तामिलों की, १०३; सिपाहियों की, १०३; तामिल स्त्रियों की, १०३; गंधार की, १०४ से; राजपुरुषों की १०४; व्यापारियों की, १०७; सिपाहियों की, गंधार; १०७-१०८; शिकारियों, नौतिहरों, पहलवानों, ब्राह्मणों की, गं ार, १०८; स्त्रियों की, गंधार १०९; कुषाणयुग की, ११४ से; प्रमदियों की, ११४; घुड़सवार इत्यादि, ११४; शक राजाओं की ११७; स्त्रियों की, कुषाणयुग, १२२; ईरानी-स्त्रियों की १२५-१२६; नर्तकी, दक्षिण भारत की,— १२७; नर्तकी की, १२९; सिकंदरिया से आए व्यापारियों, की, १३७; सेवकों इत्यादि की, दक्षिण भारत, १३१; स्त्रियों की दक्षिण में, १३४ से, साधुओं की, १३५; सिपाहियों की, १३५; बच्चों की, १३५, सिले, गुप्तयुग में, १३८ से; सिक्कों पर, १३९ विदेशी दासियों की गुप्तयुग, १४१-४२; परिवर्तन गुप्तयुग, १४२; सिपाहियों की, गुप्तयुग १४३; गुप्त युग में इतिहास के साधन, १४३-१४४; संन्त-साधुओं की, गुप्त, १५० से; १५७ से; स्त्रियों की, १५८ से; राजा की, १५९; सिपाहियों की, १६०; राजकर्मचारी, १६१ से; शैव संन्यासी, १६२; जैन छेद सूत्रों में, १६२ से; जैन साधुओं की, १६३ से; जैन साधुओं को विदेशों में, १६६; जैन साध्वियों की, १६९ से; नाचने गाने वालों की, १७१ से; भिक्षुणियों की, १७५ से; इत्सिंग द्वारा वर्णित, १७५ से; युवानच्वांग द्वारा वर्णित, १७५; नागरिकों की, १७७; ठंढे प्रदेशों की, १७७; भिक्षुणियों की, १७६-१७७; कर्मचारियों की, १८२; सिपाहियों की, १८२; स्त्रियों की, १८३; पर विदेशी प्रभाव, १८३-१८४; अजंटा, १८४ से; गुप्त सिक्कों पर, १८४ से; संन्यासियों की, अजंटा, १८७; फीलवानों की, १९४ से; सिपाहियों की, १९५; शिकारियों की, १९५; ईरानी राजा की, १९७; घुड़सवारों की, १९७ से, कंचुकी की, १९८; मंत्रियों की, १९८; नागरिकों की, १९९; वादकों की, २०२; द्वारपालों की, २०३; भृत्यों की, २०३; साधारण जन की, २०६; ब्राह्मणों की, २०६; विदूषकों की, २०७; विदेशियों की, २१० से; मध्य एशिया वालों की, २११; सोरियनो की, २११ से; बच्चों की, २१४; स्त्रियों की, २१९ से; दासियों की, २२०; मध्यवर्ग की स्त्रियों की, २२१; आभीर स्त्रियों की, २२८; सांखिकों की, २२८

c15.136

शंकराभरणे, एक विशेष वस्त्र, १७०

c15.137

शंकास्य, ६२, ८७, १६२, १८३, १८७, १९८, १९९, २०६, २२८

c15.138

शाल्य, वेशभूषा, १२, १६, २०

c15.139

शण, ९७; —शाटिका, ९७; —शाटी, १०२

c15.140

शतवलितक, धोती बांधने का तरीका, ३८

c15.141

शलाका, टट्टी, ३६; बांस की खपची, ४३

c15.142

शवनस्, एक तरह का जूता, १७८, १७९

c15.143

शाकुला, एक तरह का समूर, ४९

c15.144

शाण, सनई कपड़ा, ३१, ३४, ९७, १६४

c15.145

शाणक, १६४, १६३

c15.146

शाम्बल्य, समूर, १०-११

c15.147

शिखरथं, २६

c15.148

शीर्षक रड़ाह, १०८

c15.149

शीर्षपट्ट, १०५, १०७, ११०, १३१, १३२, १३४, १८२, १८३, १८५, १९९

c15.150

शौनक, कमरबन्द की पट्टी, ३५

c15.151

श्यामिका, एक तरह का समूर, ४९

c15.152

संकक्षिका, १७५, १७६

c15.153

संघाटी, १७०, १७१, १७५

c15.154

संचन, सूचना, ५४

c15.155

संपुटिका, पाजामा, ५४

c15.156

संवास, कपड़ा, १४

c15.157

संस्थान, चादर, १५७

c15.158

सगमोलिगने, घटिया कपड़ा, ९४

c15.159

सट्ट साटक, कीमती साड़ी, ३७

c15.160

सत्तलिका, सहा, ५४

c15.161

सत्यक, कांची, ४३

c15.162

सत्यकोस, ४२

c15.163

समंतभद्रक, चादर, ५३

c15.164

समस्तात्तत्सक, पूरे पैर का जूता, १७२

c15.165

समूर, १२, २९, ४८, ४९, ५०, ६०, ९९, १०१, १६४, १९१, २११, २२१, २२२

c15.166

सहिणकल्लम, नक्काशीदार रंगीन कपड़ा, १४६

c15.167

साटक, साड़ी, ३१

c15.168

साड़ी, मोहेजोदड़ो, ५; ३७; मौर्ययुग, ६३; भरहुत, ६९, ७१, ७३; ७५; सांची, ८१; तमिलनाडु की, ९५; १०३, १०९, १११, ११४, १२२, १२५, १३४, १३९, १५९, १६६, १७०, १७५, १८२, २१०, २१९, २२१, २२२

c15.169

साणिय, सणी कपड़ा, ३१

c15.170

सातीना, काला समूर, ५०

c15.171

सामूली, समूर, ५०

c15.172

सिंचन, शब्द की व्युत्पत्ति, ३

c15.173

सिंधु, बाबुली भाषा में सूती कपड़ा, ३; सिंधु के कपड़े, १५६; —सौवीर, वहां के कपड़े, १५७

c15.174

सिचू, झालर, १६

c15.175

सिट्री, कपड़ा बुननेवाली, १५

c15.176

सिलाई, ३, १५ से, १९, ४१ से, ४४, ४५, ६८, ८५, ९०, १६४ से सिलो, बुनना, १५ सिले, तामिल, बुनना, १५ सौवेय्यक दुस्सा, शिविवेश का दुशाला, २९-वस्त्र, कपड़ा २९ सुखुमसुत्त, महीन सूत, २७ सुचेलक, कीमती कपड़े, १५४ सुत्तलक, ऊंचा नीचा रफू, ४६ सुन्धयः धुला कपड़ा, १० सुरभि, बदन पर ठीक बैठने वाला कपड़ा, १६ सुरुचन, सुचना, ५३ सुवर्ण, घोल या द्रुति बनाने की विधि, १५२; सुनहरा कपड़ा, १४९ सुवर्णकुड्यक, सुवर्णकुडया का दुकूल, ५५; पटोरा, ५५ सुवसन्, अच्छा कपड़ा, १५ सुवासस्, अच्छे कपड़े पहनने वाले, १६ सुवासा-उर्णावती, सिंध घाटी का नाम, १० सुसनड, गंढी, ३१ सूचिकार, ४२-४३ सूची, ४२; -वान्, सूईकारी, १७; नालिका, रखने की नली, ४२ सूत, २८, ३१, ३२, ५६, ५७, ५८, ८६, ९३ सूत्रशाला, ५९ सूत्राध्यक्ष, उसके कर्तव्य, ५७-५८ सेलुग, एक तरह की कपास, १५४ सौत्तिक, सूत बेचने वाला, २६ सौमित्तिका, ओहार या झूल, ५२ स्कंधकरणी, जैन साध्वियों का एक वस्त्र, १७० स्तनमट्टू, १९; १११, १५९, २२०, २२४, २२९ स्तवस्क, एक तरह का ईरानी कपड़ा, १६०, १६१ स्पूण, वहां के कीमती वस्त्र, १६८-१६७ स्थूलशाटक, मामूली कपड़े, १५४ स्वस्तिक, एक तरह की नक्काशी, १५३ स्निग्धंश्व, धुले कपड़े, १६ हप्तथर, झूल, ३३ हर्ममी, किखाब, ९७ हस्तिशौंडिक, धोती बांधने का एक तरीका, १८ हिरण्यवस्त्र, किखाब, ३१ हिरिवस्त्र किखाब, ९७ हंस दुकूल, १४४, १४५, १४७, १४८, २२९

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