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Pracin Bharatiya Veshabhusha c4.101

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c4.101

Language
Hindi

c4.101

साड़ियां दो प्रकार से पहनी जाती थीं। एक में एक हिस्सा कमर में लपेट लिया जाता था और दूसरा पीछे खोंस लिया जाता था, दूसरी में साड़ी का एक सिरा कंधे पर डाल लिया जाता था । कभी कभी साड़ी काफी बड़ी होती थी और उसका छुट्टा भाग आगे अथवा पीछे लटका रहता था । कभी-कभी साड़ी का छुट्टा सिरा बायें कंधे पर योजक से बांध दिया जाता था, कभी-कभी साड़ी का छुट्टा सिरा दाहिने स्तन को अनावृत रखते हुए कंधे पर डाल दिया जाता था, ढीली तौर से साड़ी पहनने में बांयीं छाती खुली रह जाती थी, दुपट्टा या चादर का एक छोर कमरबंद में खोंस लिया जाता था। स्त्रियां अक्सर अपने जूड़े झेबर्रों से सजाती थीं, पर कभी कभी मुकुट भी पहनतीं थीं ।