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Pracin Bharatiya Veshabhusha c4.122

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c4.122

Language
Hindi

c4.122

गुप्तयुग में प्रायः नौकर-चाकर सिले वस्त्र पहने दिखलाये गये हैं। इससे यह न समझ लेना चाहिए कि वे सब विदेशी थे । लगता है कुषाणयुग में राज दरबार की प्रथा के अनुसार दास-दासियां भी सिले कपड़े पहनने लगे और वही प्रथा गुप्तकाल में भी प्रचलित रही। इस युग में विदेशों से भी दास-दासियों के आने का जैन साहित्य में उल्लेख है जिससे पता लगता है कि अफ्रिका, अरब, ईरान, यूनान, मध्य एशिया इत्यादि से दासियां इस देश में आती थीं और वे अपने जातीय पहरावे पहनतीं थीं। लगता है राजमहल के अंदर रहने वाली दासियों के पहरावे का प्रभाव दूसरों पर भी पड़ा होगा। पर गुप्तयुग में विदेशी व्यापा- स्त्रियों और सिपाहियों के सिले वस्त्रों का प्रभाव भी पड़ा । समन्वय के इस युग की एक विशेषता है कि विदेशी वस्त्रों के ग्रहण करते हुए भी उन्हें भारतीयता के सांचे में ढाला गया ।

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