Pracin Bharatiya Veshabhusha c4.126
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c4.126
- Language
- Hindi
c4.126
शाल और चादरें निम्न लिखित भांति की होती थीं—उद्द (ऊद बिलाव के चमड़े के बने रूमाल), पेस (सुईकारी के कामवाला शाल), पेसल (पश्मीने की चादर), नीला आइणग (नीलगाय के चमड़े से बना ओढ़ना), गोरभिगाइणग (एक सफेद पशु के चमड़े से बनी चादर), कणग (सुनहरे काम की चादर), कणगकंतिय (सोने के भरपूर काम वाली चादर), कणगपट्ट (पूरी कलाबत्तू से विनी चादर), कणगखचित (जरदोज़ी के काम की चादर), कणगफूसिय (थोड़े सुनहले काम की चादर), कणगपक्क (सुनहरे किनारे वाली चादर), कणगफुल्लिय (जिसके फूल कलाबत्तू से कढ़े हों), ऊंट, बाघ और चीतों की खालों से बने प्रावार, आभरण (पत्तों की नक्काशी वाली चादर), आभरण-विचित (भरी नक्काशीदार चादर), मसंग (पश्मीना), तिरोटपट्ट (तिरोट वृक्ष की छाल के रेशे से बने महीन कपड़े), बद्धस (टसर), इत्यादि । इनके सिवाय रल्लक (एक तरह का कंबल) और शांणक (सणी कपड़ा ) के नाम भी आये हैं।