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Pracin Bharatiya Veshabhusha c4.128

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c4.128

Language
Hindi

c4.128

अमर कोश में कपड़े बुनने की क्रिया का उल्लेख है। करघे से तुरन्त उतरे कपड़े को निष्प्रवाणि, बिना कुंदी किये कपड़े को अनाहत, और करघे पर चढ़े कपड़े को तंत्रक कहते थे । कपड़े के किनारे को दशा या वलति, लंबाई को दैर्ध्य, आयाम और आरोह और पनहे को परिणाह और विशालता कहते थे । साधारणतः बहुमूल्य कपड़ों के लिए सुचेलक और पट और मामूली कपड़ों के लिए वराकि और स्थूलशाटक शब्द आये हैं। कपड़े धोने के लिए पहले वे सज्जीखार के घोल में डाल दिये जाते थे और बाद में उबाल कर साफ पानी में धो लिये जाते थे ।

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