Pracin Bharatiya Veshabhusha c4.129
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c4.129
- Language
- Hindi
c4.129
गुप्तयुग के साहित्य में कपड़े बुनने के प्रसिद्ध स्थलों के नाम आये हैं । मधुरा की डोरिया प्रसिद्ध थी। लाट देश से आकर मंदसोर में बसे पट्टवाय बहुत ही कोमल रंग बिरंगे और नक्काशोदार रेशमी कपड़े बिनते थे । आसाम के रेशमी कपड़ों में जाती पट्टिका (चमेली के फूलों से अलंकृत मूंगा) और कोमल चित्रपट मुख्य थे । पौंडू (उत्तर बंगाल) के धोती दुपट्टे प्रख्यात थे । गुजरात की बांधणी या चूँदरी को पुल्कबंध कहते थे । कोट्टम्ब (आधुनिक पठान कोट), ताम्रलिप्ति (आधुनिक तामलुक) और सिधु कपड़े बुनने के बड़े केन्द्र थे । शायद पुष्पपट्ट (किखाब) काशी में बुने जाते थे ।