Pracin Bharatiya Veshabhusha c4.136
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c4.136
- Language
- Hindi
c4.136
जैन छेद सूत्रों से भी गुप्त की वेश-भूषा पर काफी प्रकाश पड़ता है । हमें बतलाया गया है कि निम्नलिखित अवसरों के लिए अलग-अलग कपड़े होते थे—नित्यनिवसन, मज्जनिक (नहाने के बाद के कपड़े) क्षणोत्सविक (तिहवारों पर पहनने के कपड़े) और राजद्वारिक (राजा से भेंट करने के समय के कपड़े) । कपड़े खूब साफ सुथरी तौर से रक्खे जाते थे । इनकी धुलाई (धौत), कुंबी (धुष्ट), नाड़ी (मृष्ट), और बासने (संप्रधूमित) का उल्लेख है । कपड़ों के भिन्न-भिन्न भागों में देवताओं और असुरों के निवास का लोगों को विश्वास था। शायद इसका यह कारण रहा हो कि लोग धार्मिक अवसरों पर ठीक नाप के शुद्ध कपड़े पहनें ।