Pracin Bharatiya Veshabhusha c4.142
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c4.142
- Language
- Hindi
c4.142
जैन साध्वियां अपने शरीर को अच्छी तरह से ढकने के लिए निम्न लिखित वस्त्र पहनती थीं—अवग्रह (गुप्तांग ढकने के लिए एक तिकोना कपड़ा), पट्ट (नीवी बंद), अर्धोरुक (जांघिया), चलनिका (आधी जांघों की घाघरी), अंतरनिवसनी (कपड़े पहनते समय आड़ के लिए एक गमछानुमा वस्त्र), बहिर्-निवसनी (एड़ी तक पहुंचती साड़ी), कंचुक (यह ढैसिला वस्त्र होता था), औपकक्षिकी (छाती ढकते हुए दाहिने कंधे पर बंधा वस्त्र विशेष), वैकक्षिकी (वैकक्ष्य), संघाटी (भिन्न भिन्न अवसरों पर पहनरने के लिए चार संघातियां होती थीं) और स्कंधकरणी (हवा से कपड़े उड़ने से बचाने के लिए कंधे पर पहराजाने वाला एक वस्त्र-विशेष) । गृहस्थ स्त्रियों की तरह साध्वियां साड़ी की चुनन आगे या पीछे नहीं खांत सकती थीं। वे पर्यस्तक भी नहीं पहन सकती थीं; पर बीमारी में यह आज्ञा लागू नहीं थी, फिर भी यह आवश्यक था कि वह जालीदार न हो।