Pracin Bharatiya Veshabhusha c4.145
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c4.145
- Language
- Hindi
c4.145
जैन साधू और साध्वियों की उपरोक्त वेश-भूषा में हम जैन-धर्म के विकास का रूप पाते हैं । आरंभ में कड़े वस्त्र केवल सामाजिक नियमों की पाबंदी के लिए पहने जाते थे, पर धीरे-धीरे भारतीय संस्कृति की विलासिता के प्रभाव से तप-प्रधान जैन धर्म भी नहीं बच सका और जैन धर्म को भी अपने वस्त्र संबंधी कठोर नियमों को ढीला करना पड़ा ।