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Pracin Bharatiya Veshabhusha c4.18

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c4.18

Language
Hindi

c4.18

वैदिक साहित्य में कुछ ऐसे वस्त्रों के नाम आये हैं जिनकी ठीक ठीक पहचान नहीं हो सकती। बरासी शायद वरस नाम के वृक्ष की छाल के रेशे से बनता था। दूर्श शायद किसी किस्म का ऊनी वस्त्र था, क्षौम अलसी की छाल के रेशे से बना वस्त्र होता था जो कभी-कभी रंगीन भी होता था। पांड्वाविक ऊन का बना सफेद वस्त्र था। तार्प्य की ठीक ठीक पहचान नहीं हो सकती, शायद यह किसी तरह का रेशमी कपड़ा था। कपास का सब से पहला उल्लेख आश्वलायन श्रौतसूत्र में आया है, इसके कई कारण हो सकते हैं। (१) सिंधु सभ्यता का आर्यों को ज्ञान नहीं था। पूर्वी भारत में आने पर उन्होंने कपास के कातने बुनने से परिचय प्राप्त किया। (२) शायद अनार्य वस्त्र होने से आर्य इसके व्यवहार करने में हिचकिचाते हों, पर इसकी संभावना कम है।