Pracin Bharatiya Veshabhusha c4.183
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c4.183
- Language
- Hindi
c4.183
अन्त में मैं उन मित्रों का आभारी हूं, जिन्होंने मुझे इस कठिन विषय को आगे बढ़ाने में सदा प्रोत्साहित किया। इन मित्रों में डा० वासुदेवशरण मुख्य हैं। पर यह पुस्तक अधूरी ही रह जाती, अगर मेरे चित्रकार मित्रों ने मेरा हाथ न बंटाया होता। प्रारम्भ में श्री हरिहरलाल मेढ़ और श्री जगन्नाथ अहिवासी ने मेरी बड़ी सहायता की। बाद में श्री राम सूबेदार ने आकृतियों के बनाने का काम संभाला, बिना इनकी मदद के शायद यह काम हो न कर पाता। एतदर्थ में इन मित्रों को हार्दिक धन्यवाद देता हूँ। प्रेस कापी तैयार करने में मेरी पत्नी श्रीमती शान्ति देवी ने पूरा हाथ बंटाया, इसके लिए मैं उन्हें क्या धन्यवाद दूँ।