Pracin Bharatiya Veshabhusha c4.29
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c4.29
- Language
- Hindi
c4.29
इस युग में कपास की खूब खेती होती थी और बनारस की कपास मशहूर थी। रूई धुनने, कातने और सूत की गड्डियां बनाने का भी वर्णन है। रेशमी कपड़े भी पहने जाते थे । बाहीक और चीन से भी रेशमी कपड़े आते थे । क्षोम के बने कपड़े बहुत महीन और सुन्दर होते थे । यह कपड़ा अलसी की छाल के रेशों से बनता था । उड्डीयान और गंधार के रक्त कंबल बहुत मशहूर थे । शिवि देश के घुस्सों की तो काफी कीमत होती थी । पंजाब और गंधार ऊनी कपड़ों के लिए प्रसिद्ध थे । पंजाब, उत्तरी सीमा प्रान्त, पूर्वी अफगानिस्तान से खालें कीमती शाल, समूर इत्यादि इस देश में आते थे। इस युग में पामीनों का बड़ा नाम था । आधुनिक पठानकोट में कोटंबर नाम के बहुत ही अच्छे ऊनी वस्त्र बनते थे। किखाव को हिरण्य वस्त्र कहते थे ।