Pracin Bharatiya Veshabhusha c4.3
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c4.3
- Language
- Hindi
c4.3
इसमें संदेह नहीं कि दर्शन और धार्मिक तर्क भारतीय जीवन को बहुत प्रिय थे और जहां तक सूक्ष्म से सूक्ष्म आधिदैविक विचारधाराओं के सृजन और मनन का संबंध है, भारतीय संसार के बड़े से बड़े दर्शनों से टक्कर लेते हुए आगे निकल जाते हैं। पर साथ ही साथ भारतीय जीवन और उसके आधिभौतिक साधनों से भी प्रेम करते थे। सुसज्जित महल, करीनेदार नगर, अनेक जातियों और वर्गों वाले वास-वासियों से युक्त राज सभाएं, वादक और नर्तक, चमचमाते हुए गहने और अनेक तरह की वेश-भूषाएं और कपड़े, प्रसाधन के लिए अनेक भांति के गंध द्रव्य, ये सब भी तो भारतीय संस्कृति और जीवन के प्रतीक थे। दार्शनिकों को सभ्यता के इन बाह्य प्रतीकों में अस्थिरता भले ही देख पड़ती हो, लेकिन सांस रिकता में पड़े हुए एक साधारण जन के लिए तो सभ्यता के ये प्रतीक सत्य और सुन्दर देख पड़ते हैं। सभ्यता के इन बाह्य प्रतीकों से हम इतिहास की सूखी हड्डियों में जान डाल सकते हैं। रूखी घटनाओं के विवरण से यह संभव नहीं है।