Pracin Bharatiya Veshabhusha c4.2
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c4.2
- Language
- Hindi
c4.2
अब प्रश्न यह उठता है कि क्या असत के प्रति आध्यात्मिक विचार ही भारतीय संस्कृति है? कदापि नहीं। भारतीय दृष्टाओं के मतानुसार जीवन का परम ध्येय धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष हैं; इन चारों के संतुलित और सम्मिलित प्रयोग से ही हम पूर्णता और विकास के पथ पर अग्रसर होते हैं। अगर हम केवल धर्म और मोक्ष के साधन में ही लगे रहें, तो इसके माने होते हैं कि जीवन में अर्थ और काम की कोई महत्ता ही नहीं है। ऐसा करने से जीवन एकांगी बन जाता है और उस पूर्णता और गौरव तक नहीं पहुँच सकता, जो आदर्श जीवन के लक्ष्य हैं।