Pracin Bharatiya Veshabhusha c4.5
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c4.5
- Language
- Hindi
c4.5
सकते हैं। इस संबंध में हम यह कह देना उचित समझते हैं कि हमें साहित्य को सांस्कृतिक इतिहास में सब से ऊँचा स्थान नहीं देना चाहिए। एक लेखक चाहे वह कितना ही विद्वान् अथवा सूक्ष्म-दर्शक हो, एक वस्तु विशेष का विवरण हमारे सामने उतनी खूबी से नहीं रख सकता, जितनी सफाई या सुंदरता के साथ एक मूर्ति, स्तभ अथवा चित्रकार। साहित्यिक पुरातत्त्व का अपने क्षेत्र में महत्त्व है, लेकिन और अच्छे सबूतों के रहते हुए इसको प्रधानता न देना ही श्रेयस्कर है।