Pracin Bharatiya Veshabhusha c4.58
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c4.58
- Language
- Hindi
c4.58
राज के निजी कपड़े बुनने के कारखाने सूत्राध्यक्ष के जिम्मे होते थे । इन कारखानों में विधवाएं, वृद्धा दासियां इत्यादि काम पर रक्खी जाती थीं और उन्हें ऊन, कर्च, क्षौम इत्यादि से सूत तैयार करना पड़ता था । कातिनों को उनके काम के अनुसार वेतन मिलता था । छुट्टियों में काम करने का भी पारिश्रमिक मिलता था, पर काम खराब करने वालों का वेतन काट लिया जाता था । अच्छे कारीगरों को विमल तर रखने के लिए तेल इत्यादि इनाम में दिये जाते थे। कारखानों के सिवाय ठीके पर भी कपड़े बुनवाये जाते थे । घर से बाहर न निकल सकने वाली स्त्रियों को घर पर ही काम देने का प्रबंध था। कारीगरों को बढ़ावा देने के लिए रेशमी, सूती और ऊनी वस्त्र इनाम में दिये जाते थे। वस्त्रों पर चुंगी भी लगती थी । कपड़े, किंशुक, कुसुंभ और कुंकुम के रंगों में रंगे जाते थे ।