Pracin Bharatiya Veshabhusha c4.7
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c4.7
- Language
- Hindi
c4.7
वेश भूषा के इतिहास में भारतीय वस्त्रों का भी इतिहास आ जाता है, क्योंकि प्राचीन पहरावों में हमारी दिलचस्पी और बढ़ जाती है जब हम ठीक-ठीक जान लेते हैं कि वे किन कपड़ों से बनते थे और बड़े सादे होते थे अथवा नक्काशीदार। भारत के प्राचीन वस्त्र-व्यवसाय के इतिहास के लिए भी ऐसी जांच-पड़ताल बहुत जरूरी है। उदाहरणार्थ अभी तक हम प्राचीन भारतीय वस्त्रों के इतिहास के लिए यूनानी लेखकों के ही आश्रित थे और उनसे भी हमें उन कपड़ों के भारतीय नाम नहीं मिलते। हमारा साहित्य इस कमी को बहुत कुछ दूर कर देता है। वैदिक, बौद्ध और जैन साहित्यों तथा आख्यायिकाओं और कोशों में वस्त्रों के ऐसे सैकड़ों नाम सुरक्षित हैं। इस बृहद् साहित्य में आयी तालिकाओं और उनकी टीकाओं से उन वस्त्रों के केवल नाम ही नहीं, उनके विवरण भी मिलते हैं। साहित्य से यह भी पता चलता है कि देश के किन-किन भागों और नगरों में अच्छे कपड़े बनते थे। इन तालिकाओं में सन और वल्कल के बने वस्त्रों के