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Pracin Bharatiya Veshabhusha c4.88

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c4.88

Language
Hindi

c4.88

भिक्षुक तथा श्रमण-ब्राह्मण वृक्षों की छालों के रेशों, घास इत्यादि के बने कपड़े और ऊंट, बकरों इत्यादि के बालों के बने कंबल और जानवरों की खालें पहनते थे । इस युग में भारत और रोम के बीच चमड़े और समूरों का अच्छा व्यापार था। समूर चीन, तिब्बत इत्यादि देशों से भारत में आते थे । कुछ मामूली दरजे के चमड़े अथवा कंबल भी खंभात की खाड़ी हो कर पूर्वी अफ्रिका जाते थे ।