Pracin Bharatiya Veshabhusha c4.9
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c4.9
- Language
- Hindi
c4.9
यह कहना कठिन है कि आदिम युग में भारतीयों की वेश-भूषा क्या थी । हमें अभी तक की खोजों से यह पता नहीं लगा है कि वे कपड़े पहनते थे अथवा नहीं और अगर कपड़े पहनते थे, तो वे चमड़े के बने होते थे अथवा पत्तियों और छालों के । प्रागैतिहासिक गुफ़ा-चित्रों से तो यही पता चलता है कि उस युग के लोग प्रायः नग्न रहते थे और अचेलकत्व कोई बुरी बात नहीं मानी जाती थी । इस संबंध में हम कुछ प्राचीन संप्रदायों में अचेलकत्व का उल्लेख कर देना चाहते हैं। बौद्ध साहित्य में तो ऐसे अनेक नंगे साधुओं के संप्रदायों का उल्लेख आया है जिनमें मुख्य जैन थे । लगता है उनका नग्नत्व उस प्राचीन समाज के नग्नत्व की ओर इशारा करता है जब शरीर ढकने की भावना का उदय नहीं हुआ था । धीरे-धीरे जब सभ्यता ने आगे क़दम बढ़ाया, तब समाज तो वस्त्रों का आदी हो गया, पर उसके धार्मिक गुरु नग्नत्व की प्राचीनतम प्रथा अपनाये रहे, जो एक समय सर्वसाधारण का नियम था। वैदिक और बाद के साहित्यों में आये चर्म, वल्कल और तृणों के वस्त्र भी उसी आदि सभ्यता की ओर संकेत करते हैं । बात यह है कि पूरा समाज एक साथ ही उन्नति के पथ पर अग्रसर नहीं होता, उसका कुछ भाग हमेशा पीछे रह जाता है और प्राचीनता को निभाये चलता है । इन्हीं पिछड़े लोगों के विश्वासों और आदतों से हम बहुत प्राचीन काल की सभ्यता का चित्र खींच सकते हैं ।