Pracin Bharatiya Veshabhusha c8.s5.4
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c8.s5.4
- Language
- Hindi
c8.s5.4
३—कलमितिका२९—इस शब्द के पाठभेद कुलमितिका और कथमितिका भी हैं। गणपति शास्त्री इसका अर्थ गजास्तरण करते हैं । पर इस अर्थ तक वे कैसे पहुंचे यह कहना कठिन है । शायद कुथं और कुलं या कलं में समानता मान लेने से यह भ्रम हुआ हो । अगर यह अर्थ ठीक है तो क(कु)लमितिका का शुद्ध पाठ कुथं होना चाहिए । इस दृष्टि से शामा शास्त्री का दिया हुआ कथमितिका शुद्ध पाठ के बहुत पास है । शायद ठीक पाठ कुथमितिका था जिसके अर्थ होते हैं ठीक नाप वाला गजास्तरण । लेकिन अगर कलं-कुलं पाठ ही ठीक मान लिया जाय तो इस शब्द की समानता फारसी कुलाह से की जा सकती है जिसके अर्थ टोपी होते हैं और इसी अर्थ में शामा शास्त्री द्वारा उल्लिखित टीकाकार ने इस शब्द के अर्थ किये हैं ।