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Viyahapannatti 12.2.535

Viyāhapannatti: Hindi translation (Dīparatnasāgara, 2019) 12.2.535

Language
Hindi

12.2.535

उस काल उस समय में महावीर स्वामी (कौशाम्बी) पधारे, यावत्‌ परीषद्‌ पर्युपासना करने लगी। उस समय उदायन राजा को जब यह पता लगा तो वह हर्षित और सन्तुष्ट हुआ। उसने कौटुम्बिक पुरुषों को बुलाया और उनसे इस प्रकार कहा – ‘देवानुप्रियो ! कौशाम्बी नगरी को भीतर और बाहर से शीघ्र ही साफ करवाओ; इत्यादि सब वर्णन कोणिक राजा के समान यावत्‌ पर्युपासना करने लगा।
तदनन्तर वह जयन्ती श्रमणोपासिका भी इस समाचार को सूनकर हर्षित एवं सन्तुष्ट हुई और मृगावती के पास आकर इस प्रकार बोली – (इत्यादि आगे का सब कथन), नौवें शतक में ऋषभदत्त ब्राह्मण के प्रकरण के समान, यावत्‌ – (हमारे लिए इह भव, परभव और दोनों भवों के लिए कल्याणप्रद और श्रेयस्कर) होगा; तक जानना चाहिए। तत्पश्चात्‌ उस मृगावती देवी ने भी जयन्ती श्रमणोपासिका के वचन उसी प्रकार स्वीकार किए, जिस प्रकार देवानन्दा ने (ऋषभदत्त के वचन) यावत्‌ स्वीकार किये थे। तत्पश्चात्‌ उस मृगावती देवी ने कौटुम्बिक पुरुषों को बुलाया और उनसे इस प्रकार कहा – देवानुप्रियो ! जिसमें वेगवान घोड़े जुते हुए हों, ऐसा यावत्‌ श्रेष्ठ धार्मिक रथ जोतकर शीघ्र ही उपस्थित करो। कौटुम्बिक पुरुषों ने यावत्‌ रथ लाकर उपस्थित किया और यावत्‌ उनकी आज्ञा वापिस सौंपी।
इसके बाद उस मृगावती देवी और जयन्ती श्रमणोपासिका ने स्नानादि किया यावत्‌ शरीर को अलंकृत किया फिर कुब्जा दासियों के साथ वे दोनों अन्तःपुर से नीकलीं। फिर वे दोनों बाहरी उपस्थानशाला में आई और जहाँ धार्मिक श्रेष्ठ यान था, उसके पास आकर यावत्‌ रथारूढ़ हुई। तब जयन्ती श्रमणोपासिका के साथ श्रेष्ठ धार्मिक यान पर आरूढ़ मृगावती देवी अपने परिवार सहित, यावत्‌ धार्मिक श्रेष्ठ यान से नीचे ऊतरी, तक कहना चाहिए। तत्पश्चात्‌ जयन्ती श्रमणोपासिका एवं बहुत – सी कुब्जा दासियों सहित मृगावती देवी श्रमण भगवान महावीर की सेवा में देवानन्दा के समान पहुँची, यावत्‌ भगवान को वन्दना – नमस्कार किया और उदयन राजा को आगे करके समवसरण में बैठी और उसके पीछे स्थित होकर पर्युपासना करने लगी।
तदनन्तर श्रमण भगवान महावीर ने उदयन राजा, मृगावती देवी, जयन्ती श्रमणोपासिका और उस महत्ती महापरीषद्‌ को यावत्‌ धर्मोपदेश दिया, यावत्‌ परीषद्‌ लौट गई, उदयन राजा और मृगावती रानी भी चले गए।

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