Viyahapannatti 9.32.451
Viyāhapannatti: Hindi translation (Dīparatnasāgara, 2019) 9.32.451
- Language
- Hindi
9.32.451
उस काल, उस समय में वाणिज्यग्राम नामक नगर था। वहाँ द्युतिपलाश नाम का चैत्य था। महावीर स्वामी पधारे, समवसरण लगा। परिषद् निकली। (भगवान ने) धर्मोपदेश दिया। परिषद् वापिस लौट गई। उस काल उस समय में पार्श्वापत्य गांगेय नामक अनगार थे। जहाँ श्रमण भगवान् महावीर थे, वहाँ वे आए और श्रमण भगवान् महावीर के न अतिनिकट और न अतिदूर खड़े रह कर उन्होंने, श्रमण भगवान् महावीर से इस प्रकार पूछा –
भगवन् ! नैरयिक सान्तर उत्पन्न होते हैं, या निरन्तर ? हे गांगेय ! सान्तर भी उत्पन्न होते हैं और निरन्तर भी। भगवन् ! असुरकुमार सान्तर उत्पन्न होते हैं या निरन्तर ? सान्तर भी उत्पन्न होते हैं और निरन्तर भी है। इसी प्रकार स्तनितकुमारों तक जानना।
भगवन् ! पृथ्वीकायिक जीव सान्तर उत्पन्न होते हैं या निरन्तर ? गांगेय ! पृथ्वीकायिक जीव सान्तर उत्पन्न नहीं होते किन्तु निरन्तर उत्पन्न होते हैं। इसी प्रकार वनस्पतिकायिक जीवों तक जानना चाहिए। द्वीन्द्रिय जीवों से लेकर वैमानिक देवों तक की उत्पत्ति के विषय में नैरयिकों के समान जानना चाहिए।
Translations (2)
- Viyāhapannatti: Gujarati translation (Dīparatnasāgara, 2020) — Gujarati
- English (machine translation) — English, machine translation
Commentaries (1)
- Viyāhapannatti: ṭīkānusārī vivecana — Muni Dīparatnasāgara 2000, Gujarati
Linked texts (1)
- Viyāhapannatti — Sudharman, Ardhamāgadhī Prakrit