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भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c11.35

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c11.35

Language
Hindi

c11.35

१ अनुस्वार नकार (अनुनासिक) का स्वरमय उच्चारण दिखाता है. वेदों में जब अनुस्वार ‘र’, ‘श’, ‘ष’ और ‘ह’ के पहिले आता है तब उसका उच्चारण ‘ग’ से मिश्रित ‘गुं’ या ‘ग्वं’ सा होता है जिसके लिये वेदों में ध[^७] चिह्न है. यह यजुर्वेद में ही मिलता है. शुक्लयजुर्वेद के प्रातिशाख्य में इसके ह्रस्व, दीर्घ और गुरु तीन भेद माने गये हैं जिनके न्यारे न्यारे चिह्नों की कल्पना की गई है. प्राचीन शिलालेखों में कभी कभी ‘वंश’ की जगह ‘वंᳵश’ और ‘सिंह’ के स्थान में ‘सिᳵह’ खुदा मिलता है. अनुस्वार का ‘श’ के पहिले ऐसा उच्चारण आर्यकंठों में अब भी कुछ कुछ पाया जाता है और कई बंगाली अपने नामों के हिमांशु, सुधांशु आदि को अंगरेजी में Himangshu, Sudhangshu (हिमांग्शु, सुधांग्शु) आदि लिख कर ध[^७] के उच्चारण की स्मृति को जीवित रखते हैं.