भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c25.s2.23
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c25.s2.23
- Language
- Hindi
c25.s2.23
१ अरबों के द्वारा भारतीय अंकों का यूरोप में प्रवेश हुआ उससे बहुत पहिले अर्थात् ई. स. की ४ थी शताब्दी के आस पास 'निओ-पिथागोरियन' नामक अध्यात्म विद्या के उपदेशक, संभवतः अलेक्ज़ेंड्रिया (मिसर में) की तरफ भारतीय अंकों का ज्ञान प्राप्त कर, उनको यूरोप में ले गये परंतु उनका प्रचार अधिक न बढ़ा और वे सार्वदेशिक न हुए. यूरोप में भारतीय अंकों का वास्तविक प्रचार स्पेन पर अरबों का अधिकार होने के बाद अरबों के द्वारा ही हुआ. इसीसे यूरोप के वर्तमान अंकों को 'अरेबिक (अरबों के) अंक' कहते हैं. *ए. ब्रि; जि. १७, पृ. ६२६.