भारतीय पराचीन लिपिमाला (Bharatiya Pracina Lipimala: The Palaeography of India) c30.s2.4
भारतीय प्राचीन लिपिमाला (Bhāratīya Prācīna Lipimālā: The Palaeography of India) c30.s2.4
- Language
- Hindi
c30.s2.4
भूर्जपत्र पर लिखी हुई पुस्तकें विशेष कर कश्मीर में मिलती हैं और कुछ उड़ीसा आदि में. हिंदुस्तान में पूना आदि के तथा यूरोप के कई प्राचीन हस्तलिखित पुस्तकसंग्रहों में भूर्जपत्र पर लिखी हुई पुस्तकें सुरक्षित हैं जो बहुधा कश्मीर से ही ली गई हैं. भूर्जपत्र पर लिखी हुई सब से पुरानी पुस्तक, जो अब तक मिली है, खोतान से मिला हुआ खरोष्ठी लिपि के 'धंमपद' (प्राकृत) का कुछ अंश है. वह ई. स. की दूसरी या तीसरी शताब्दी का लिखा हुआ होना चाहिये. 'संयुक्तागमसूत्र' (संस्कृत) ई. स. की चौथी शताब्दी का लिखा हुआ मिला है१०. मि. बावर के पुस्तक ई. स. की छठी शताब्दी के आस-पास के और बख्शाली का अंकगणित ई. स. की ८ वीं शताब्दी के आस पास का लिखा हुआ प्रतीत होता है. ये पुस्तक स्तूपों के भीतर रहने या पत्थरों के बीच गड़े रहने से ही इतने दीर्घकाल तक बचने पाये हैं परंतु खुले रहनेवाले भूर्जपत्र के पुस्तक ई. स. की १५वीं शताब्दी के पूर्व के नहीं मिलते जिसका कारण यही है कि भूर्जपत्र, ताड़पत्र या कागज़ जितना टिकाउ नहीं होता.