Pracin Bharatiya Veshabhusha c4.153
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c4.153
- Language
- Hindi
c4.153
गुप्तयुग की मूर्ति कला में रस और आध्यात्मिकता को प्रोत्साहन देने से उसमें यथार्थवादिता की कमी आ गयी है। उसमें वेश-भूषा का चित्रण रूढ़िगत आधारों पर हुआ है, इसलिए इस युग की मूर्तियों का महत्व वेश-भूषा के इतिहास के लिए कम है; पर इस कमी को अजंटा के भित्ति चित्र पूरा करते हैं । सिक्कों से भी हम तत्कालीन वेश-भूषा का सुन्दर चित्र पाते हैं । अजंटा के चित्रों पर सिक्कों से मिली वेश भूषा से हमें पता चलता है कि भारतवर्ष मध्य एशिया, चीन और ईरान में आपस के सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध के कारण इस देश में बहुत से विदेशी वस्त्र भी ग्रहण कर लिये गये ।