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Pracin Bharatiya Veshabhusha c4.154

Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c4.154

Language
Hindi

c4.154

अजंटा के भित्ति-चित्रों में तो बोधिसत्व धोती, चादर, और मुकुट पहने दिखाये गये हैं, पर सिक्कों पर अंकित राजे तो धोती, दुपट्टा, कंचुक, पाजामा, पगड़ी, टोपी और जूते पहने दिखाये गये हैं । लगता तो यह है कि बोधिसत्वों को वेश भूषा रूढ़िगत है और सिक्कों पर राजाओं की वेश-भूषा यथार्थ है । सिक्कों पर गुप्त राजे अथवाहियां चारूदार और कामदार कोट, चूड़ीदार पाजामा और पूरे बूट पहनते थे । यह कोट कभी-कभी पूरी और ढीली आस्तीन वाला होता था और उसके साथ बटनदार बूट होता था। अथवाहियां कंचुक कभी-कभी जांघियों के साथ पहना जाता था । राजे अक्सर कंचुक, कमरबंद, जांघिया और शीर्षपट्ट युक्त पगड़ी पहनते थे । कभी-कभी वे तुकनेदार कोट, ब्रीचेस और खपुसा किस्म के जूते पहनते थे । आराम के समय राजे धोती और टोपी पहनते थे । चन्द्रगुप्त एक जगह कंचुक और कमरबंद और कहीं-कहीं जांघिया और कमरबन्द पहरे दिखलाये गये हैं । शिकार के समय राजा कंचुक, कमरबंद, धोती और खींव पहने दिखाये गये हैं । घोड़े पर सवार राजा धोती और कमरबंद और कभी-कभी कमरबंद, कंचुक और धोती पहनते थे । कभी-कभी उनके गले में दुपट्टा भी पड़ा होता था । कुमारगुप्त के युग में एक जातीय पहरावे का आविष्कार हुआ, जिसमें से पाजामा और पूरे बूट निकाल दिये गये । साधारणतः राजे चारूदार कंचुक और धोती पहनते थे और उनके साथ कमरबंद भी । सिर प्रायः खुला रहता था । कभी-कभी वे टोपी भी पहनते थे ।