Pracin Bharatiya Veshabhusha c4.83
Prācīn Bhāratīya Veśabhūṣā c4.83
- Language
- Hindi
c4.83
इस युग में रेशमी कपड़े भी खूब चलते थे और इनके लिए पट्टांशुक, चीन, कौशेय और धौतपट्ट शब्दों का व्यवहार हुआ है । विचित्र पटोलक में तरह-तरह की नक्काशियां बनी होती थीं और इसकी तुलना गुजरात की आधुनिक पटोला साड़ी से की जा सकती है ।